दौलतबाग निवासी इंद्र दास ने दंग का दर्ज बयां किया
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दंगे में मैंने अपना भाई खोया, आज तक ताजा हैं जख्म
नागफनी के दौलत निवासी इंद्र दास ने दंगे का दर्द बयां किया तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। आंसू पोछते हुए बोले, उस मंजर को कैसे भूल सकते हैं। दंगे ने मैंने अपना भाई प्रेम शंकर उर्फ डीजल को खो दिया था। उस वक्त हमारा परिवार भूड़े के चौराहे पर रहता था।
हमारा भाई प्रेम शंकर दुकान से दूध लेने निकला था। रास्ते में भीड़ ने उसे घेर लिया और हमला कर दिया था। इस हमले में प्रेम शंकर की मौत हो गई थी। इसके बाद हमारा परिवार भूड़े के चौराहे से दौलत बाग आ गया था।
मुरादाबाद दंगे (प्रतीकात्मक)
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पिता जी को ढूंढने अस्पताल पहुंचा तो लाश ही लाश थे
मुरादाबाद के ईदगाह दंगे के गवाह रहे नगर निगम कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री सुभाष गुप्ता बताते हैं कि 13 अगस्त 1980 को ईदगाह के मेन गेट के सामने ही नगर निगम निगम की ओर से कैंप लगाया गया था। इस कैंप में मैं भी मौजूद था। नमाज के बाद एचएसबी इंटर कॉलेज की ओर से आवाज आई कि जानवर घुस आया और लोगों के कपड़े खराब हो गए।
मुरादाबाद दंगे की गवाह रही ईदगाह
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इसके बाद लोग भड़क गए। अभी हम लोग कुछ समझ पाते कि पत्थर चलने लगे थे। गोलियों की आवाज आने लगीं। किसी तरह मैं वहां से निकलकर घर पहुंचा। घरवालों ने बताया कि पिता जी अभी घर नहीं आए हैं। इसके बाद मैं स्कूटर लेकर उन्हें ढूंढने निकला।
मुरादाबाद में हुए दंगे के पीड़ितों को इंसाफ की उम्मीद
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उस वक्त सरकारी अस्पताल टाउनहॅाल के पास था। जहां लाशें ही लाशें थीं। बच्चों के शव कुचले हुए थे। डरते-डरते लाशोंं के बीच मैं पिता जी को तलाशता रहा। लेकिन वह नहीं मिले। किसी तरह हिम्मत करके ईदगाह की ओर बढ़ा।
लेकिन पुलिस ने आगे जाने से रोक लिया। रात दस बजे किसी तरह पिता जी घर पहुंचे। वह बदहवास थे। दूसरे दिन वह कुछ बोलने की स्थिति हुए तो उन्होंने बताया कि ईदगाह के पास एक घर में जनता सेवक समाज के चार लोगों के साथ छिप किसी तरह जान बचाई थी।