पहले तो उसने हाथ आगे कर दुर्गेश और रितिक को बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद वह तेजी से पानी के साथ बहता चला गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इसके बाद मनोज भी पानी के तेज बहाव में बह गया। पहले रितिक, इसके बाद दुर्गेश और फिर मनोज भी लोगों की आंखों से ओझल हो गया।
मां-बाप सोचते रहे बच्चे भंडारे में गए हैं
मनोज, दुर्गेश और रितिक अपने घर से भंडारे में प्रसाद खाने की बात कहकर घर से निकले थे। मां-बाप भी सोच रहे थे कि एक दो घंटे बाद बच्चे घर लौट आएंगे लेकिन उन्होंने भंडारे के बाद रामगंगा में नहाने का प्लान बना लिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई।
अंधेरा होने तक चला सर्च ऑपरेशन
तीन बच्चों के डूबने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद पीएसी के गोताखोर बुलाए गए। टीम ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से रामगंगा नदी में करीब दो किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चलाया लेकिन बच्चों का पता नहीं चल पाया। अंधेरा होने की वजह से टीमें वापस लौट गईं। सीओ कटघर गणेश कुमार गुप्ता ने बताया कि सोमवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।
...मेरे बच्चों को ढूंढ कर ला दो
मनोज और दुर्गेश के पिता गंगाराम, मां और बहन मोनी का रो रोकर बुरा हाल है। रितिक के मां-बाप भी सदमे में हैं। गंगाराम की पत्नी बार-बार बस यही कह रही हैं कि मेरे बच्चों को ढूंढ कर ला दो। रविवार को स्कूल की छुट्टी होने के कारण बच्चे भंडारे में प्रसाद खाने चले गए थे।