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मुरादाबाद जमीन घोटाला: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने नैनीताल में खरीदे फ्लैट, दूसरे कर्मी ने लगवाया पेट्रोल पंप

Thu, 02 Oct 2025 11:37 AM IST
विमल शर्मा अरविंद उपाध्याय, अमर उजाला मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद की मायानगर सहकारी आवास समिति के 110 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि घोटाले की रकम से कई सदस्य करोड़पति बन गए। किसी ने नैनीताल में फ्लैट खरीदे, किसी ने पेट्रोल पंप लिया, तो किसी ने बेटे को विदेश भेजा। मूल आवंटी अब भी जमीन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 
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मुरादाबाद में बड़ा जमीन घाटोला आया सामने - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मायानगर सहकारी आवास समिति के जमीन घोटाले की जांच में जैसे-जैसे परतें खुलती जा रही हैं, चौंकाने वाले नए तथ्य सामने आ रहे हैं। तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार 110 करोड़ के घोटाले की रकम से कई सदस्य करोड़पति बन गए।

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सरकारी विभाग में कार्यरत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने तो नैनीताल में कई फ्लैट खरीद लिए। बेटे को विदेश में पढ़ाया। समिति के एक अन्य पदाधिकारी ने पेट्रोलपंप खरीद लिए। जबकि मूल आवंटी आज भी जमीन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मायानगर आवास विकास समिति लिमिटेड मुरादाबाद का गठन तीन जनवरी 1975 में हुआ था। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे कई जमीनें बेच डालीं। इस जमीन घोटाले में दिल्ली रोड स्थित सर्किट हाउस से लेकर लाकड़ी फाजलपुर तक कई भूखंड शामिल हैं।
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बरसों बरस यह घोटाला चलता रहा। जब मूल आवंटी शीशपाल को अपनी जमीन नहीं मिली तो इसी साल लगभग तीन महीने पहले उन्होंने कमिश्नर से इसकी शिकायत की। कमिश्नर ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया।

इसमें अपर आयुक्त प्रशासन, जिला लेखाधिकारी, सहकारी समिति के जिला प्रबंधक को शामिल किया गया। कमेटी ने समिति के अध्यक्ष फूलकुंवर और सचिव अजय दुबे सहित कई लोगों से पूछताछ की। जांच में करीब 110 करोड़ रुपये के घाटाले की बात सामने आई है।

जांच में सामने आया है कि घोटाले की रकम से कई सदस्यों ने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली। किसी ने फ्लैट खरीदे तो किसी ने पेट्रोलपंप लगा लिए। बेटे को विदेश में पढ़ने के लिए भेज दिया।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली रोड स्थित लगभग तीन बीघा जमीन पर सचिव ने स्वयं कब्जा कर लिया है। कमेटी ने समिति के अध्यक्ष और सचिव को दोषी मानते हुए रिपोर्ट सौंपी है।

कीमती जमीन के बदले ले ली दलदल वाली जमीन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मायानगर सहकारी आवास समिति की सर्किट हाउस के सामने अरबों की जमीन थी। इस जमीन पर भूमाफिया की नजर पड़ी तो समिति के सभापति और सचिव से मिलकर फर्जी कागजात तैयार कराए गए।

इन्हीं कूटरचित दस्तावेजों के सहारे जमीन अपने नाम करा ली। इस जमीन पर आवास की जगह कई फैक्टरियां और होटल स्थापित हो गए हैं। कई फैक्टरियां लीज की जमीन पर हैं। इसी कीमती जमीन के बदले समिति ने गागन नदी के किनारे दलदल युक्त 60 बीघा जमीन ली।

वर्तमान में सिर्फ दस प्रतिशत लोग ही यहां घर बनाकर रह रहे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से पहले समिति ने न तो कोई प्रस्ताव पास किया और न ही निबंधक से अनुमति ली। किसी भी विधिक प्रक्रिया का पालन किए बगैर जमीन हस्तांतरित कर दी गई।

मायानगर सहकारी आवास समिति ने अपनी बैलेंस शीट अभी तक प्रस्तुत नहीं की है। मंडल स्तर पर जांच कराई जाएगी कि इस तरह के घोटाले अन्य जिलों में तो नहीं किए गए। इस मामले में विस्तृत जानकारी उच्चाधिकारी ही दे सकते हैं। - सतीश कुमार, जिला प्रबंधक, सहकारी अधिकारी आवास

एसआईटी जांच के आसार
जमीन फर्जीवाड़े मामले की तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट मंडल स्तर से शासन को भेजी गई है। इस मामले में जमीन की खरीद-बिक्री को रोकने, स्पेशल ऑडिट कराने सहित कई बिंदुओं से जांच की संस्तुत की गई है। जमीन फर्जीवाड़े में शासन से इस मामले में एसआईटी गठित होने के आसार हैं।

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इन लोगों की जमीनों पर किया गया फर्जीवाड़ा
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि समिति से सचिव और सभापति ने जमीनों का मूल अभिलेख एवं ले आउट गायब होने का बहाना बनाया। समिति ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। शिखा बसु बनाम मायानगर गृह निर्माण समिति के मामले में गलत हलफनामा दिया गया।

इस मामले में दस करोड़ की जमीन फर्जीवाड़ा कर ट्रांसफर की गई। सुनील कुमार मल्होत्रा की 175 वर्गमीटर जमीन और एसपी शर्मा की जमीन के मामले में भी फर्जीवाड़ा किया गया। इसी प्रकार उमाशंकर की 175 वर्गमीटर जमीन भी फर्जी वसीयत के आधार पर बेच डाली गई।
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