कीमती जमीन के बदले ले ली दलदल वाली जमीन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मायानगर सहकारी आवास समिति की सर्किट हाउस के सामने अरबों की जमीन थी। इस जमीन पर भूमाफिया की नजर पड़ी तो समिति के सभापति और सचिव से मिलकर फर्जी कागजात तैयार कराए गए।
इन्हीं कूटरचित दस्तावेजों के सहारे जमीन अपने नाम करा ली। इस जमीन पर आवास की जगह कई फैक्टरियां और होटल स्थापित हो गए हैं। कई फैक्टरियां लीज की जमीन पर हैं। इसी कीमती जमीन के बदले समिति ने गागन नदी के किनारे दलदल युक्त 60 बीघा जमीन ली।
वर्तमान में सिर्फ दस प्रतिशत लोग ही यहां घर बनाकर रह रहे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से पहले समिति ने न तो कोई प्रस्ताव पास किया और न ही निबंधक से अनुमति ली। किसी भी विधिक प्रक्रिया का पालन किए बगैर जमीन हस्तांतरित कर दी गई।
मायानगर सहकारी आवास समिति ने अपनी बैलेंस शीट अभी तक प्रस्तुत नहीं की है। मंडल स्तर पर जांच कराई जाएगी कि इस तरह के घोटाले अन्य जिलों में तो नहीं किए गए। इस मामले में विस्तृत जानकारी उच्चाधिकारी ही दे सकते हैं। - सतीश कुमार, जिला प्रबंधक, सहकारी अधिकारी आवास
एसआईटी जांच के आसार
जमीन फर्जीवाड़े मामले की तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट मंडल स्तर से शासन को भेजी गई है। इस मामले में जमीन की खरीद-बिक्री को रोकने, स्पेशल ऑडिट कराने सहित कई बिंदुओं से जांच की संस्तुत की गई है। जमीन फर्जीवाड़े में शासन से इस मामले में एसआईटी गठित होने के आसार हैं।
इन लोगों की जमीनों पर किया गया फर्जीवाड़ा
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि समिति से सचिव और सभापति ने जमीनों का मूल अभिलेख एवं ले आउट गायब होने का बहाना बनाया। समिति ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। शिखा बसु बनाम मायानगर गृह निर्माण समिति के मामले में गलत हलफनामा दिया गया।
इस मामले में दस करोड़ की जमीन फर्जीवाड़ा कर ट्रांसफर की गई। सुनील कुमार मल्होत्रा की 175 वर्गमीटर जमीन और एसपी शर्मा की जमीन के मामले में भी फर्जीवाड़ा किया गया। इसी प्रकार उमाशंकर की 175 वर्गमीटर जमीन भी फर्जी वसीयत के आधार पर बेच डाली गई।