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Moradabad: मायानगर आवास समिति की बैलेंस शीट में भी गड़बड़ियां, जमीन घोटाले की एसआईटी जांच भी ठंडी

Mon, 27 Apr 2026 10:46 AM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मायानगर सहकारी आवास समिति की बैलेंस शीट में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। दस्तावेजों में काटछांट और संशोधन पाए गए हैं। वर्ष 2015 से हुए भुगतान और निर्माण से जुड़े मामलों में पूर्व उपाध्यक्ष और कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी किया गया है।  
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मुरादाबाद में बड़ा जमीन घोटाला आया सामने - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मायानगर सहकारी आवास समिति की बैलेंस शीट में भी गड़बड़ियां मिली हैं। अब समिति से जुड़े विनायक अपार्टमेंट का भी मूल्यांकन स्थानीय एजेंसी से कराया जाएगा। ऑडिट के बाद ही समिति की पूरी गड़बड़ियों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। मायानगर सहकारी आवास समिति की बैलेंस शीट की जांच ऑडिट टीम कर रही है।

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इसमें कई स्थानों पर अक्षरों और अंकों को काटकर दूसरा शब्द लिखा गया है। समिति की अंतरिम टीम का मानना है कि बैलेंस शीट में बुद्धि विहार स्थित विनायक अपार्टमेंट के लेनदेन का ब्यूरो दर्ज है। 2015 से अपार्टमेंट के निर्माण का भुगतान समिति के माध्यम से हुआ है। इस मामले में अनियमितता प्रकाश में आने पर समिति के पूर्व उपाध्यक्ष और कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी किया गया है।

अब सिटी मजिस्ट्रेट के अधीन काम कर रही अंतरिम टीम ने विनायक अपार्टमेंट का मूल्यांकन करने के लिए शहर की एक एजेंसी को बुलाया है। मूल्यांकन के बाद कार्यदायी संस्था के जवाब का मिलान किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय ने इस मामले में खुली बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भी समिति की गड़बड़ियों का लोगों ने खुलासा करते हुए पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
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सौ से अधिक शिकायतें अंतरिम सभापति को मिल चुकी हैं। आरोप लगाया है कि फ्लैट और जमीन के लिए पैसा जमा होने के बाद संपत्ति दूसरे को आवंटित कर दी गई। सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय ने बताया कि ऑडिट चल रहा है। जांच में कई मामले सामने आए हैं।

पैसा जमा होने के बाद सोसायटी से नहीं मिली जमीन या फ्लैट
मायानगर सहकारी आवास समिति में पैसा जमा होने के बावजूद सदस्यों को मकान या फ्लैट नहीं मिल सका। ऐसे 120 लोग अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। कई लोग संपत्ति के लिए लड़ते-लड़ते दुनिया से विदा हो गए। इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट को प्रार्थनापत्र देकर पीड़ित पहले शिकायत कर चुके हैं। लोगों का भरोसा है कि अंतरिम समिति से उनको न्याय मिलेगा। लोगों का कहना है कि जांच हुई तो कई अवैध ढंग से संपत्ति हथियाने वाले बाहर होंगे।
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जमीन घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी सुस्त पड़ी 
अपर आयुक्त आवास के निर्देश पर डीएम ने समिति की जमीन के घोटाले की जांच के लिए एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। जांच टीम ने एक माह तक काम किया। इसके बाद एसआईआर अभियान शुरू होने के बाद जमीन घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। पांच माह बाद भी समिति की जमीनों का ऑडिट जारी है। लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है।
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