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Moradabad: गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के दावों की उड़ीं धज्जियां, दोबारा परीक्षा देने को मजबूर विद्यार्थी

Wed, 25 Feb 2026 01:45 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के एलएलबी के एक पेपर की परीक्षा धामपुर के एक केंद्र में पुराने प्रश्नपत्र से कराए जाने के कारण निरस्त कर दी गई। इससे 437 विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।  
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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने शुचितापूर्ण परीक्षा के दावे की धज्जियां उड़ाई गईं। इसकी वजह से अब लॉ संकाय के धामपुर में 437 विद्यार्थी दोबारा परीक्षा देने को मजबूर हो गए हैं। विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार अब इन विद्यार्थियों की परीक्षा 27 फरवरी को होगी।

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विश्वविद्यालय द्वारा एलएलबी के पेपर कोड 12705 लॉ ऑफ टॉर्ट्स प्रश्नपत्र की परीक्षा सोमवार दोपहर दो बजे से पांच बजे तक कराई गई। परीक्षा केंद्र 711 आरएसएम पीजी कॉलेज धामपुर बिजनौर में पुराने प्रश्नपत्र से परीक्षा संपन्न कराई गई।

इस परीक्षा केंद्र पर अफजलगढ़ लॉ कॉलेज अफजलगढ़ के 54, धामपुर लॉ कॉलेज के 94 विद्यार्थी, जेके मॉर्डन लॉ कॉलेज नगीना रोड धामपुर के 70 विद्यार्थी, लक्ष्य कॉलेज ऑफ लॉ भगवरा स्यौहारा के 113 विद्यार्थी और लोकमनि लाॅ कॉलेज कादराबाद खुर्द स्यौहरा के 106 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
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विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक अमृत लाल द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार एलएलबी के पेपर कोड 12705 लॉ ऑफ टॉर्ट्स प्रश्नपत्र की परीक्षा निरस्त की जाती है। एलएलबी के पंजीकृत छात्र-छात्राओं की पुन: परीक्षा 27 फरवरी को आयोजित करवाई जाएगी।

हिंदू कॉलेज में भी खुल गया था लॉ ऑफ टॉर्ट्स का पेपर
परीक्षाओं में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बृहस्पतिवार को हिंदू कॉलेज में कमरा नंबर 45 में विधि संकाय की हिंदू लॉ (कोड 12703) का पेपर था। दोनों कक्ष निरीक्षकों ने प्रश्नपत्र के बंडल से पेपर निकालकर लॉ ऑफ टॉर्ट्स (कोड 12705) का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया था।

एक छात्र के टोकने पर कक्ष निरीक्षक ने तुरंत पेपर वापस ले लिए थे। इसके करीब 15 मिनट बाद हिंदू लॉ का प्रश्नपत्र वितरित किया गया था। मामले के निरीक्षण के लिए कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी भी पहुंचे थे। विद्यार्थियों का आरोप था कि शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय भी नहीं दिया था।
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कुलपति ने अपना नंबर कमांड सेंटर के रूप में सक्रिय रखने का किया था दावा
जब 16 जनवरी से स्नातक और परास्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरु हुई थीं तो कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी ने अपना, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक का मोबाइल नंबर कमांड सेंटर की तरह काम करने का दावा किया था।

 हर जनपद में सचल दल भी गठित किए थे। इसके अलावा हर गतिरोध को सुलझाने के लिए स्वयं के निरीक्षण करने का भी दावा किया था। यहां तक कि पर्यवेक्षक लगाने की भी बात कही थी, इसके बावजूद परीक्षाओं में लापरवाही के मामले सामने आ गए।
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