रोजाना 8000 जांचों का यह है गणित
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 1600 मरीज आते हैं। इनमें से 300 को डॉक्टर जांच कराने के लिए कहते हैं। इसके अलावा रोजाना 200 प्रशिक्षु आरक्षियों के सैंपल आ रहे हैं। इस तरह 500 लोगों की अलद-अलग प्रकार की जांचें होती हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) का कहना है कि सीबीसी को सिर्फ एक जांच न गिनकर हीमोग्लोबीन, एसजीओटी, एसजीपीटी, प्लेटलेट्स काउंट, आरबीसी आदि को अलग-अलग गिना जाना है। इस प्रकार एक व्यक्ति की औसतन 16 जांचें होती हैं।
बुधवार को लैब में हुए 14000 टेस्ट
अस्पताल की एसआईसी डॉ. संगीता गुप्ता का कहना है कि बुधवार को लैब में 14000 टेस्ट किए गए हैं। मंगलवार को यह संख्या 8000 थी। 20 दिन तक इसी तरह टेस्ट की संख्या ज्यादा रहेगी। मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए एक और काउंटर बनाने की तैयारी है।
साथ ही स्वास्थ्य निदेशालय से अनुरोध किया गया है कि एक और बारकोड सिस्टम अस्पताल को दिया जाए। ताकि काम जल्दी हो सके। उम्मीद है जल्द ही सिस्टम प्राप्त हो जाएगा। कुछ माह में एनएचएम के जरिये टेक्नीशियंस की भर्ती भी होगी।
पुलिस लाइन में आरक्षियों की ट्रेनिंग ने और बढ़ाया दबाव
पुलिस लाइन में 4000 से ज्यादा प्रशिक्षु आरक्षियों की ट्रेनिंग चल रही है। हर दिन 200 कैडेट्स के सैंपल जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं। पुलिस लाइन में ही इनकी सैंपलिंग के लिए यूपीएचसी पर तैनात टेक्नीशियन भेजे जा रहे हैं। ऐसे में पैथोलॉजी की मशीनों पर लोड ओर बढ़ गया है। रात 12 बजे तक जांचें की जा रही हैं। अगले दिन कोई मशीन खराब हो जाती है तो मरीजों को भटकना पड़ता है। हार्मोंस, विटामिन-डी व थायराइड की जांच की मशीन अकसर खराब रहती है।