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मुरादाबाद जिला अस्पताल: जांचने में हांफ रहीं लैब की मशीनें, हर तीसरे दिन खराब, ट्रेनी सिपाहियों ने बढ़ाया दवाब

Thu, 24 Jul 2025 04:01 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में रोजाना आठ हजार जांचें हो रही है। यह काम केवल चार मशीनों और तीन टेक्नीशियनों के सहारे हो रहा है। इससे मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं साथ ही मरीजों को भी घंटों लाइन में लगकर जांच का इंतजार करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल मुरादाबाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद जिला अस्पताल की पैथोलॉजी पर हर दिन मरीजों का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है। बायोकेमिस्ट्री की चार मशीनों और तीन टेक्नीशियंस के भरोसे रोजाना औसतन आठ हजार से ज्यादा जांचें हो रही हैं। नतीजतन हर तीसरे दिन मशीन खराब हो रही है।

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इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हार्मोंस की जांच करने वाली मशीन अब खराब ही पड़ी है। बुधवार दोपहर करीब एक बजे जिला अस्पताल की पैथोलॉजी के बाहर मरीजों की कतार थी। लाइन में लगे कानून गोयान निवासी जीवनराम ने बताया कि उन्हें चार दिन से बुखार है।

डॉक्टर ने पर्चे पर जांच लिखी है। वह जांच कराने के लिए 40 मिनट से लाइन में खड़े हैं। नंबर कब आएगा, पता नहीं। ऐसे और भी मरीज थे जो इंतजार करके थक चुके थे। भीड़ की समस्या से बचने के लिए ही दो माह पहले जिला अस्पताल में पैथोलॉजी की जगह बदली गई है।
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इसे इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री का नाम दिया गया। यहां 24 घंटे मरीजों की सैंपलिंग करने का दावा किया गया लेकिन दोपहर दो बजे तक ही सैंपलिंग की जा रही है।

रोजाना 8000 जांचों का यह है गणित 
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 1600 मरीज आते हैं। इनमें से 300 को डॉक्टर जांच कराने के लिए कहते हैं। इसके अलावा रोजाना 200 प्रशिक्षु आरक्षियों के सैंपल आ रहे हैं। इस तरह 500 लोगों की अलद-अलग प्रकार की जांचें होती हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) का कहना है कि सीबीसी को सिर्फ एक जांच न गिनकर हीमोग्लोबीन, एसजीओटी, एसजीपीटी, प्लेटलेट्स काउंट, आरबीसी आदि को अलग-अलग गिना जाना है। इस प्रकार एक व्यक्ति की औसतन 16 जांचें होती हैं। 

बुधवार को लैब में हुए 14000 टेस्ट
अस्पताल की एसआईसी डॉ. संगीता गुप्ता का कहना है कि बुधवार को लैब में 14000 टेस्ट किए गए हैं। मंगलवार को यह संख्या 8000 थी। 20 दिन तक इसी तरह टेस्ट की संख्या ज्यादा रहेगी। मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए एक और काउंटर बनाने की तैयारी है।

साथ ही स्वास्थ्य निदेशालय से अनुरोध किया गया है कि एक और बारकोड सिस्टम अस्पताल को दिया जाए। ताकि काम जल्दी हो सके। उम्मीद है जल्द ही सिस्टम प्राप्त हो जाएगा। कुछ माह में एनएचएम के जरिये टेक्नीशियंस की भर्ती भी होगी।
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पुलिस लाइन में आरक्षियों की ट्रेनिंग ने और बढ़ाया दबाव
पुलिस लाइन में 4000 से ज्यादा प्रशिक्षु आरक्षियों की ट्रेनिंग चल रही है। हर दिन 200 कैडेट्स के सैंपल जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं। पुलिस लाइन में ही इनकी सैंपलिंग के लिए यूपीएचसी पर तैनात टेक्नीशियन भेजे जा रहे हैं। ऐसे में पैथोलॉजी की मशीनों पर लोड ओर बढ़ गया है। रात 12 बजे तक जांचें की जा रही हैं। अगले दिन कोई मशीन खराब हो जाती है तो मरीजों को भटकना पड़ता है। हार्मोंस, विटामिन-डी व थायराइड की जांच की मशीन अकसर खराब रहती है।
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