संभल के 14 साल पुराने मां-बेटे की हत्या के मामले में अदालत ने मृतका के पति दिलशाद और देवर शमशाद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दिलशाद ने अपने भाई के साथ पत्नी और साैतेले बेटे की हत्या करने के बाद उसके पूर्व पति के खिलाफ केस दर्ज करा दिया था। हालांकि, पुलिस जांच में मामला खुल गया था।
रानी की शादी मो. अली से हुई थी। मो. अली से रानी के तीन बच्चे निशा, मंतशा और सोनू हुए। मो. अली की माैत के बाद रानी ने संभल के असमोली थाना क्षेत्र के नया गांव निवासी आबिद से निकाह कर लिया था। करीब पांच साल तक रानी आबिद के साथ रही। संभल के नखासा थाना क्षेत्र के फिरोजपुर निवासी दिलशाद बुकनाला में सैलून चलाता था।
दिलशाद का आबिद के घर आना-जाना था। इस दौरान दिलशाद और रानी के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया तो रानी ने दिलशाद से कोर्ट मैरिज कर ली और अपने बेटे और बेटियों के साथ दिलशाद के साथ रहने लगी थी। रानी की दिलशाद से तीसरी शादी थी।
हत्यारे भाइयों ने न केवल पुलिस को गुमराह किया था, बल्कि गवाहों को भी बरगलाया। हालांकि, मृतका रानी की बेटी निशा ने अपनी मां और भाई को इन्साफ दिलाने की ठान ली थी। वह अदालत में पेश हुई। उसने बताया कि मेरी मां और दिलशाद के बीच विवाद रहता था।
घटना वाली रात दिलशाद और शमशाद ने मेरी मां की गर्दन काट कर हत्या कर दी थी और मेरे छोटे भाई सोनू को गला दबाकर मार डाला था। इसके बाद दोनों भाई एक कमरे में बंद होने का नाटक करने लगे थे। अदालत ने बेटी को गवाही को अहम माना और दोनों भाइयों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।