बेटे का एक निजी स्कूल में एडमिशन करना है।ट्रांसपोर्ट की फीस के अलावा किताबें इस साल महंगी हो गई है। कई स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए जानकारी ली। हर स्कूल में फीस, किताबों की कीमत अलग अलग है। कम पैसे खर्च होने वाले निजी स्कूल में एडमिशन को लेकर बात फाइनल हुई है। हरिओम सैनी, अभिभावक
मैंने सोमवार को ही कोर्स खरीदा है। जो 4600 रुपये में मिला है। इसमें एनसीईआरटी की एक भी किताब नहीं है। साथ ही मुरादाबाद की एक ही दुकानों में यह किताबें उपलब्ध होगी, जिससे यह भी नहीं सोच सकते कि दूसरी दुकान पर जाकर डिस्काउंट करवा लेंगे। - शालू सैनी, अभिभावक
एनसीईआरटी और निजी किताबों में 100 रुपये का भी अंतर होता तो शायद परेशानी नहीं होती, लेकिन जहां एनसीईआरटी का पूरा कोर्स आ जाएगा। वहां एक निजी किताब आ रही है। साथ ही 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने के बाद 1200 रुपये क्वार्टर फीस अलग लगा दी है। - सौरभ अग्रवाल, अभिभावक
सरकार ने अगर एनसीईआरटी की किताबों के सिलेबस को अप्रूव्ड किया है, तो वह किताबें बच्चों के लिए सही ही होंगी। फिर भी पता नहीं क्यों एनसीईआरटी की जगह निजी किताबों को आगे रखा जा रहा है। मेरी बेटी की 70 प्रतिशत किताबें निजी हैं। निजी किताबें 5 से 6 दुकानों पर मिलनी चाहिए, जिससे एक ही दुकान से किताबें खरीदने का दबाव न हो। - नेहा मिश्रा, अभिभावक