लखनऊ के गोमती नगर थाने की होमगार्ड अर्चना रावत की हत्या मुरादाबाद पुलिस लाइन में तैनात उसके प्रेमी कांस्टेबिल प्रदीप ने की थी। लखनऊ में तैनाती के दौरान प्रदीप का अर्चना से अफेयर शुरू हुआ था। होमगार्ड अर्चना रावत सिपाही प्रदीप पर शादी के लिए दबाव बना रही थी।
जबकि पहले से शादीशुदा प्रदीप इसके लिए तैयार नहीं था। शादी नहीं करने पर होमगार्ड ने सिपाही को बलात्कार में जेल भिजवाने की धमकी दी थी। जिसके बाद उसने साजिश रचकर उसे मार डाला। एएसपी डा. ओपी सिंह ने बताया कि होमगार्ड अर्चना रावत पुत्री ननकऊ निवासी विजयीपुर विभूति खंड गोमती नगर (लखनऊ) का शव 19 दिसंबर को सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव नया बांस के पास कुएं से मिला था।
अर्चना के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तो मुरादाबाद पुलिस लाइन में तैनात कांस्टेबल प्रदीप का नाम सामने आया। पुलिस पूछताछ में प्रदीप ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। प्रदीप ने बताया कि 2012 में वह लखनऊ के गाजीपुर थाने में तैनात था। जहां उसकी मुलाकात होमगार्ड अर्चना रावत से हुई थी और दोनों में दोस्ती हो गई।
अर्चना लगातार उस पर शादी का दबाव बना रही थी जबकि वह पहले से ही शादीशुदा है। अर्चना उस पर पत्नी और बच्चों को भी छोड़ने का दबाव बना रही थी। अर्चना से पीछा छुड़ाने के लिए उसने अपनी पोस्टिंग मुरादाबाद में करा ली, लेकिन यहां भी अर्चना ने पीछा नहीं छोड़ा और उसकी बात न मानने पर जेल भिजवाने की धमकी दी।
इस पर प्रदीप ने अर्चना को रास्ते से हटाने का ही मन बना लिया। कांस्टेबल प्रदीप ने 16 दिसंबर को लखनऊ फोन कर अर्चना को मुरादाबाद बुलाया। यहां दोनों मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में रुके। 17 दिसंबर को प्रदीप अर्चना को बाइक पर लेकर अपने गांव गौतमबुद्धनगर के गांव दुजाना थाना बादलपुर के लिए निकला। सिंभावली क्षेत्र में नया बांस के जंगल में उसने ईंट और डंडे से मारकर अर्चना की हत्या कर दी।
‘मेरे मासूम बेटे की मौत का कारण बनी थी अर्चना’
कांस्टेबल प्रदीप घटना का खुलासा करते वक्त रो पड़ा। उसने बताया कि 2012 में लखनऊ में उसकी पोस्टिंग के दौरान होमगार्ड अर्चना अपने पति से तलाक के लिए आवेदन कर चुकी थी। अर्चना से दोस्ती के बाद दोनों के संबंध बन गए। इसी दौरान प्रदीप का बेटा बीमार पड़ गया और वह घर जाने की तैयारी करने लगा।
तभी अर्चना ने प्रदीप को घर जाने से मना कर दिया और उस पर शादी कर परिवार और बच्चों को छोड़ने का दबाव बनाया। घर जाने पर उसे अधिकारियों के समक्ष झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी। प्रदीप के अनुसार वह डर गया और अर्चना की बातों में आ गया।
इधर, बीमारी में प्रदीप के बेटे की मौत हो गई। इससे उसे गहरा आघात लगा और उसने अर्चना रावत से पीछा छुड़ाने का मन बना लिया। सितंबर में उसने अपनी पोस्टिंग मुरादाबाद पुलिस लाइन में करा ली और यहीं से अर्चना को ठिकाने लगाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया।