मुरादाबाद। हवा की गति सामान्य से पांच गुना अधिक होने के बावजूद प्रदूषण के स्तर में मंगलवार को बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार सुबह मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर देश में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे स्थान पर था। विशेषज्ञों का कहना है कि पीतल भट्ठियों के अलावा आग की घटनाओं से भी वातावरण में भारी कणों की बढ़ोतरी होती है।
मंगलवार सुबह दस बजे मुरादाबाद का एक्यूआई 322 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था, जिसमें पीएम 10 का अधिकतम स्तर 402 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 375 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। नेशनल एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम की समन्वयक डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि जागरूकता के अभाव में भी कुछ लोग कूड़े में आग लगा देते हैं। इसके अलावा पीतल की भट्टियां और जाम लगना तो प्रमुख वजह है। उन्होंने बताया कि पीएम 2.5 पीएम 10 से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि पीएम 10 फेफड़े तक जाता है, जबकि पीएम 2.5 के कण फेफड़ों के माध्यम से खून में घुल जाते हैं। हवा में मौजूद विषैली धातुएं शरीर के अंगों को जैसे किडनी, लीवर, हृदय, अग्न्याशय आदि को प्रभावित करती है। मंगलावर सुबह सिंगरौली का एक्यूआई 343, धरूहेरा का 341 और बागपत का 316 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
दोपहर बाद कम हुई हवा की गति
मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस, न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस, सुबह की आर्द्रता 64 फीसदी, शाम की 39 फीसदी दर्ज की गई। सुबह दस बजे के करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा थी, जो दोपहर बाद पश्चिम दिशा से 20 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने में पीतल भट्ठी, जाम तो कारण हैं ही, इसके अलावा पिछले चार-पांच दिनों में मुरादाबाद में आग की घटनाएं भी हुई हैं। हवा का रुख चारों तरफ रहता है। इसकी वजह से भी प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा हम अन्य बिंदुओं पर भी जांच करवा रहे हैं।
- विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड