मुरादाबाद जिले के सभी 34 बैंकों में 73299 खाता धारकों ने पिछले दस साल से अपने खातों की सुध नहीं ली है। जिससे बैंकों ने खाते की राशि डेफ खाते में डाल दी। अब यह रकम आरबीआई को स्थानांतरित की जाएगी।
डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड को डेफ खाता बोलते हैं। यह खाता बैंकों का होता है। जिसमें लावारिस खातों की राशि जमा की जाती है। बैंकों में जाकर ग्राहक दस साल तक खातों की सुध नहीं लेता है तो जमा राशि को डेफ फंड में डाल दिया जाता है। जिसे कागजी प्रकिया पूरी करने पर ब्याज के साथ में रुपये वापस मिल जाते हैं।
इसमें एसबीआई, पंजाब नेशनल, केनरा, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद आदि बैंकों को मिलाकर 16 बैंक में 15.92 करोड़ रुपये डेफ खाते में हैं। जिसमें सबसे अधिक प्रथमा बैंक के 6.92 करोड़ रुपये हैं। एसबीआई में 2.89 करोड़ रुपये हैं। वहीं पंजाब नेशनल में 1.30 करोड़ रुपये हैं। बाकी के 13 बैंकों में 4.70 करोड़ रुपये हैं।
डेफ खाते की धन राशि ग्राहकों को एक सप्ताह में मिल जाएंगी। इसके लिए उन्हें जिस शाखा खाता है। उसमें जाने होगा। इसके बाद साबूत के साथ में रुपये पर क्लेम करना होगा। वहीं ग्राहक के पास सभी कागजात पूरे होने चाहिए। इसके बाद एक फार्म भरना होगा। बैंक आरबीआई को पैसे वापसी का रिक्वेस्ट भेजकर एक सप्ताह में रुपये ग्राहक के खाते में ट्रांसफर कर देगी।
बैंकों ने ग्राहकों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन किसी ग्राहक से प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद बैंक खाताधारक के पते पर नोटिस भेजा। इसके बाद भी कोई रुपयों पर हक जताने नहीं आया तो खाते की धनराशि को डेफ खाते में डाल दिया गया। -विशाल दीक्षित, एलडीएम