आठ साल से देता रहा चकमा
एसआईटी के अनुसार आरोपी जिया फैसल ने अपने सगे भाई जिया अफजल के नाम से ‘अल ग्रेन लास्को’ नाम की फर्म का पंजीयन कराया। इस फर्म से 2017-18 मे फर्जी बिलों के आधार पर माल की स्थानीय तौर पर आठ करोड़ 55 लाख 7 468 रुपये की खरीद दर्शाया। साथ ही 6 करोड़ 46 लाख रुपये की बाहर के प्रांतो में बिक्री को स्टाक में प्रदर्शित किया। उसने 1.80 करोड़ रुपये की जीएसटी का समायोजन आईटीसी के माध्यम से किया।
इसी तरह आरोपी ने अजमत खान के नाम से एके इंटरनेशनल फर्म घोषित कर जीएसटी में पंजीयन कराया। जांच में आया कि आरोपी ने 2018-19 में 7. 17 करोड़ रुपये की स्थानीय आपूर्ति भी दिखाया था। साथ ही 25.72 करोड़ रुपये की बाहरी सप्लाई दर्शाया। फर्म ने 7.20 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी दर्शाया और उसे आईटीसी क्लेम भी कर दिया।
आठ साल में किया अरबों का लेनदेन
एसआईटी की जांच में मुख्य आरोपी जिया फैसल के चार बैंक खातों के माध्यम से अरबों रुपये के लेनदेन पाए गए हैं। बोगम फर्मों के माध्यम से आरोपी ने कोटक महिन्द्रा बैंक में तीन खाते खोल रखे हैं।
महिमा एक्जाइम नामक फर्म के खाते से 2 अरब 98 करोड़ 64 लाख 92 हजार 97 रुपये, वैभव इंटरप्राइजेज नाम की फर्म के खाते में 73 करोड़ 78 लाख 65 हजार 168 रुपये, नरेश एंड कंपनी नाम की फर्म के खाते में 1 अरब 55 करोड़ 60 लाख 82 हजार 895 रुपये का लेनदेन किया है। इसके अलावा आईसीसीआई बैंक में अल ग्रेन लासको नाम की फर्म के खाते से 14 करोड़ 78 लाख 97 हजार 8 रुपये का लेनदेन पाया गया है।