मुरादाबाद। समय से एक सप्ताह पहले दस्तक देकर मानसून दगा दे रहा है। बार-बार का पूर्वानुमान गलत साबित हो रहा है। आठ जुलाई से अब तक बादल नहीं बरसे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 वर्षों में यह मानसून की सबसे कमजोर शुरुआत है। मौसम वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को इसका कारण माना है। अब तक करीब साढ़े चार सौ मिली मीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 143 मिली मीटर बारिश हो सकी है। इससे पहले वर्ष 2002 में जून से 15 जुलाई तक करीब 125 मिली मीटर बारिश हुई थी। वर्ष 2012 में पूरे मानसून सीजन में 655.5 मिली मीटर बारिश हुई थी, जो पूरे सीजन की सबसे कम बारिश है।
पंतनगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि 15 जुलाई तक करीब ढाई सौ मिली मीटर औसत बारिश होनी चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ सात मिलीमीटर बारिश हुई है। पूरे जुलाई महीने का औसत 350 मिलीमीटर है। वहीं जून माह की औसत बारिश 200 मिलीमीटर है, जिसमें से जून में सिर्फ 136 मिलीमीटर बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि बादल और ठंडी हवा चल रही है। इसके बावजूद बारिश नहीं हो रही है। सामान्य तौर यह अंतराल जुलाई के अंतिम सप्ताह में या अगस्त माह के शुरुआत में आता है। इस वर्ष यह शुरुआत में ही आ गया है और मानसून ब्रेक में 22 दिन का समय हो गया है। जिसकी वजह से दूसरा चरण सक्रिय नहीं हुआ है। मानसून की शुरुआत में आठ से दस दिन लगातार खूब बारिश होती है। इस वर्ष जुलाई माह में आखिरी बारिश आठ जुलाई को 5.8 मिलीमीटर हुई है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जारी होने वाले पूर्वानुमान में आगामी दिनों में होने वाली बारिश का पता लग जाएगा।
सोमवार को बारिश होने का अनुमान था, लेकिन दिनभर इंतजार के बाद भी बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति पूरब से पश्चिम दिशा में पांच से दस किलोमीटर प्रति घंटा रही।
जलवायु परिवर्तन है कारण
डॉ. आरके सिंह के अनुसार मानसून में 22 दिन का ब्रेक हो गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह हो रहा है। हाल ही में मौसम विभाग का एक शोध हुआ है, जिसमें जानकारी मिली है कि जलवायु परिवर्तन में तापमान बढ़ने के कारण जैसा मौसम रहेगा, वह अति हो जाएगी। जैसे यदि बारिश होगी तो बहुत ज्यादा होगी। यदि सूखा होगा तो वह भी बहुत ज्यादा होगा। अभी मानसून में 22 दिन का सूखा हो गया है, जबकि प्रत्येक सप्ताह 45 से 50 मिली मीटर बारिश होनी ही चाहिए। प्रति सप्ताह लगातार चार दिन बारिश होती है। इस वर्ष पहाड़ों में बादल फटना भी बहुत ज्यादा हो रहा है। पहले दो से तीन साल में एक बार बादल फटते थे, लेकिन अब एक साल में तीन से चार बार बादल फट रहे हैं।