मुरादाबाद। पिछले एक सप्ताह से जारी शीतलहर का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिदिन अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। 28 दिसंबर के साथ सोमवार को सीजन का सबसे सर्द दिन दर्ज किया गया। दिनभर सूरज की किरणें नहीं चमक सकीं। इसकी वजह से शहरवासियों को कड़ाके की ठंड झेलनी पड़ी। पंड़ितों के अनुसार चतुर्ग्रही और पंचग्रही योग बनने की वजह से प्रचंड सर्दी पड़ रही है। अब 15 जनवरी तक मौसम ऐसा ही रहने के आसार हैं।
उत्तर पश्चिमी हवाओं ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। सुबह से खराब होने वाला मौसम शाम तक बरकरार रहता है। सोमवार को कोहरे की जबरदस्त मार रही। दस मीटर भी दृश्यता नहीं रह गई थी। सड़कें कोहरे की बूंदों की वजह से पूरी तरह से गीली हो चुकी थीं। सूरज की किरणें नहीं चमकने की वजह से शाम जैसा आभास बना रहा। गलन और ठिठुरन से लोग बेहाल होते रहे। गलियों में जगह-जगह अलाव जलते देखे गए। घरों में भी हीटर और ब्लोअर चलते रहे। बुजुर्ग और बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए गर्म कपड़ों का सहारा देने के अलावा हीटर की तपिश भी दी जा रही है। सोमवार को कार्यालयों में भी कड़ाके की ठंड का असर देखा गया। कर्मचारी अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ देर से पहुंचे। मफलर और दस्ताने से पूरी तरह से ढंके होने के बाद भी ठिठुरन में कमी नहीं आ रही थी। दिनभर गलन का असर होने की वजह से अधिकतम और न्यूनतम के बीच के अंतर में बहुत कमी आई है।
राजकीय इंटर कालेज स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निसार अहमद अंसारी ने बताया कि 28 दिसंबर को भी अधिकतम तापमान 8.7 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को अधिकतम तापमान 8.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंत नगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि उत्तर पश्चिमी हवाओं और पर्वतीय क्षेत्र से बर्फीली हवाओं का प्रभाव है। 31 दिसंबर से न्यूनतम में सुधार होगा, लेकिन ठंड से राहत धूप पर निर्भर है। पश्चिमी विक्षोभ के एक जनवरी के बाद आसार है। मंगलवार को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। धूप नहीं होने से फसलों के बढ़ाव पर प्रभाव पड़ेगा। गेहूं की पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान होने पर वृद्धि रुक जाती है। दो-तीन दिन तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से कम था, लेकिन अब सुधर रहा है। धूप नहीं होने से आलू, टमाटर, मटर की पैदावार में असर पड़ेगा। सामान्य अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जो अब सामान्य से करीब नौ डिग्री सेल्सियस कम है। इसकी वजह से गलन हो रही है। हवा भी ठंडी और सूखी है। यह राजस्थान से आ रही है। रेत गर्मी में जितना गर्म होता है, सर्दी में उतना ही अधिक ठंडा होता है। इसकी वजह से मुरादाबाद के आस-पास के जिलों में सर्दी का प्रकोप हो रहा है।
15 साल बाद बना कड़ाके की ठंड का योग
ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर दिसंबर-जनवरी में ठंड अभी तक के सारे रिकॉर्ड तोडे़गी है। इन दिनों में चतुर्र्गही व पंचग्रही योग बन रहे हैं। इन दिनों में ठंड अपना प्रचंड रूप दिखाएगी। इसका असर जल्द ही कड़ाके की ठंड के रूप में नजर आएगा और बारिश भी पड़ेगी। यह योग 15 साल बाद बना है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया इन दिनों पंचांगीय गणना के अनुसार 16 दिसंबर सोमवार के दिन अश्लेषा नक्षत्र व कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य का धनु राशि में प्रवेश दोपहर तीन बजकर 23 मिनट पर हुआ। सूर्य का धनु में प्रवेश होते ही धनुर्मास का आरंभ हो जाता है। धर्म शास्त्र में सूर्य की धनु संक्रांति धार्मिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण मानी जाती है। धनुर्मास कहलाने वाला यह समय शिशिर ऋतु का आरंभ भी माना जाता है। ग्रह-गोचर की गणना करें तो इस बार का शीतकालीन प्राकृतिक सत्र पूर्वोत्तर तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र पर पुराने रिकॉर्ड तोड़ेगा। उसका मुख्य कारण यह है कि दिसंबर-जनवरी माह में ग्रहों का युतिकृत व दृष्टि संबंध मौसमी प्रभाव को दर्शाएगा, जिसके प्राकृतिक परिवर्तन तथा ऋतुकालीन स्थिति आम जन-जीवन को प्रभावित करेगी। सूर्य, गुरु, शनि, केतु के साथ बुध का युति संबंध बनेगा। युतिकृत बुध का प्रभाव इन दिनों में विशेष तौर पर दिखाई देगा। यह समय पृथ्वी के ज्यादातर भागों पर अपना रौद्र प्रभाव छोड़ेगा। 15 जनवरी के बाद आंशिक राहत मिलेगी। सूर्य के उत्तरायण की अयन पद्धति में मकर राशि के प्रवेश काल से मौसम में ऊष्मा का प्रभाव बढ़ जाएगा है।
घरों से बाहर न निकलें बुजुर्ग
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नितिन बत्रा ने बताया कि सांस की बीमारियां और दिल के दौरे पड़ते है। रक्तचाप में बढ़ोतरी होती है। ठंड से बचना ही प्रमुख है। सांस की दवाओं को नियति तौर पर लें। हृदय रोगी सर्दी में बिल्कुल भी घर से बाहर नहीं निकलें। उच्च रक्तचाप वाले मरीज चिकित्सकों की सलाह पर दवाई की डोज बढ़ाएं। ज्यादा सर्दी में खून गाढ़ा हो जाता है। खून की धमनियां सिकुड़ जाती हैं और पसीना कम आता है। हृदयाघात और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है। हल्का गर्म पानी पीना चाहिए। ब्लोअर और हीटर चलाते समय कमरा थोड़ा खुलना होना चाहिए और बर्तन में पानी होना चाहिए, इससे हवा नहीं सूखती है और आर्द्रता सही बनी रहती है। नहाते समय गैस वाले गीजर पर विशेष ध्यान देना चाहिए। लापरवाही से बेहोशी होने या सांस रुकने की भी घटनाएं होती हैं। बंद कमरे में अंगीठी और लकड़ियां जलाकर नहीं सोएं।
बच्चों को विंटर डायरिया से बचाएं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पायल पुरी का कहना है कि इस समय खांसी जुकाम और उल्टी-दस्त की समस्या बहुत हो रही है। मौसम बदलने से एलर्जी हो रही है। विंटर डायरिया और वायरल डायरिया की वजह से उल्टी-दस्त हो रही है। सुबह और शाम के समय बच्चों को घर से बाहर नहीं निकालें। मौसमी फल और मौसमी सब्जी का सेवन करें। एंटी-बायटिक जरूरत से ज्यादा सेवन नहीं करें। नियमित तौर पर गुनगुना पानी पीएं। कई बार ठंड में पानी नहीं पीया जाता है। ओआरएस के सेवन से नुकसान नहीं होता है, बल्कि उल्टी-दस्त में यह बहुत आवश्यक है। केला खाने से सर्दी नहीं होती है। बच्चों को जंकफूड के सेवन से बचाएं। गुड़ और ड्राई फ्रूट सबसे ज्यादा बेहतर है। गुड़ से आयरन के साथ गर्मी मिलती है। शिशुओं को लेयरिंग में कपड़े पहनाएं। एक मोटे कपड़े के बचाय तीन-चार लेयर होंगे, वह ज्यादा गर्मी देंगे। मोजे, दस्ताने और टोपी जरूर पहनाएं। छोटे बच्चों को कई-कई चादरों में लपेट देते हैं, वह ज्यादा प्रभावशाली नहीं है। गर्म हवाओं वाले ब्लोअर नुकसानदायक हैं। वह ऑक्सीजन के स्तर को कम कर देते हैं। हवा शुष्क हो जाती है और बच्चों को सांस लेने में समस्या हो जाती है। अंदर और बाहर के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर होगा तो यह नुकसानदायक है। इससे वायरल इंफेक्शन के खतरें बढ़ जाते हैं। बच्चों को कई-कई दिन नहीं नहलाते हैं, इससे इन्फेक्शन के खतरे बढ़ जाते हैं। यह बहुत नुकसानदायक है। साफ-सफाई जरूरी है। स्पंजिंग करना और प्रतिदिन कपड़े बदलना जरूरी है।
बाजार में ब्लोअर-हीटर की कमी
कड़ाके की सर्दी का असर अब बाजार पर पड़ने लगा है। भयंकर सर्दी से बचने के लिए लोग हीटर और ब्लोअर लेने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं, लेकिन बाजार में इसकी कमी होने लगी है। दुकानदार मदन वर्मा के अनुसार सीजन की शुुरुआत में दिल्ली के व्यवसायी हीटर और ब्लोअर को ले जाने की कह रहे थे, लेकिन ठंड बढ़ते ही उन्होंने माल आपूर्ति करने से इन्कार कर दिया है। इसकी वजह से बाजार में हीटर-ब्लोअर कम होने लगे हैं।