उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने सेमीफाइनल मैच के दाैरान पानी पीने पर शमी को गुनहगार बताया। रोजे की अवधि में शमी के पानी पीने पर रजवी ने कहा था कि अल्लाह को जवाब देना पड़ेगा। कोच के अलावा शमी के बड़े भाई मो. हसीब ने कहा कि शमी सफर में हैं और सफर के दौरान रोजे की पाबंदी नहीं होती। इस्लाम में कुछ छूट दी गई हैं। उन्होंने कहा कि मैच के दौरान वह रोजा नहीं रख रहे हैं, जो दीन के मुताबिक गलत नहीं है।
हसीब ने कहा कि हमें संकीर्ण मानसिकता को बढ़ावा देेने की बजाय मिलकर भारतीय टीम के हक में दुआ करनी चाहिए। हसीब ने कहा कि जो लोग एसी कमरों में बैठकर बयान दे रहे हैं, वह दुबई की गर्मी को जानेंगे तो पता चलेगा। जिस दिन मैच होता है, उस दिन शमी रोजा नहीं रखते। बीमारी, परेशानी, सफर व किसी अन्य बड़ी मजबूरी के दौरान रोजा न रखने की छूट इस्लाम देता है। कोई भी मौलाना इस्लाम से बड़ा नहीं हो सकता।
शमी के परिजन बोले- बेटे पर गर्व, बयानबाजी निंदनीय
शमी के परिजनों व उनके गांव के लोगों ने भी उनका समर्थन किया है। शमी के करीबी कारी मुनीब ने कहा कि हम सभी को उन पर गर्व है। देश के लिए खेलने का काम भी अल्लाह का दिया हुआ है। छोटी बातों को लेकर बयानबाजी निंदनीय है। रोजा रखने के लिए परिस्थितियों का भी जिक्र इस्लाम में किया गया है। शमी सफर में हैं और यदि दुबई की तपती गर्मी में पानी न पीएं तो बीमार भी हो सकते हैं। बीमार होने पर भी रोजा छोड़ना पड़ता है।
इस मुद्दे पर अब मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद जैद ने भी बात की। उन्होंने कहा- जब कोई व्यक्ति यात्रा पर होता है, तो वह इस शर्त पर अपना ‘रोजा’ छोड़ सकता है कि वह रमजान के बाद इसे रखेगा। मौलाना द्वारा दिया गया बयान बचकाना है। मुझे लगता है कि यह बयान केवल टीआरपी के लिए दिया गया है। हमारे गांव के लोग ऐसे मौलाना को नहीं जानते हैं जो पूरी जानकारी न रखता हो। मुझे लगता है कि ऐसे मौलाना को ‘कठमुल्ला’ कहा जा सकता है।