मुस्लिम बहुल मानी जाने वाली इन सीटों पर सपा का दबदबा है। इन सीटों पर सपा का तिलिस्म तोड़ने के लिए भाजपा के भीतर मंथन चल रहा है। इसकी काट तलाशी जा रही है। इसमें से पांच सीटों का चुनाव परिणाम तुर्क वोटर प्रभावित करते हैं।
इनमें संभल, मुरादाबाद देहात और कुंदरकी सीट पर इस बिरादरी ने लंबे समय तक नुमाइंदगी भी की है। मंडल की सियासत में डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क की पहचान तुर्क नेता के रूप में रही है। वह संभल और मुरादाबाद से सांसद रहे।
उनके निधन के बाद बिरादरी के पास कोई बड़ा तुर्क नेता नहीं है। ऐसे में इस बिरादरी से आने वाले क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने रविवार को रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात करके मंडल में सियासी हलचल बढ़ा दी है। मंडल के तुर्कों के बीच उनके सियासी रण में उतरने की चर्चाएं भी तेज हो गईं हैं।
किस विधानसभा क्षेत्र में कितने तुर्क मतदाता
विधानसभा क्षेत्र तुर्क वोटरों की संख्या
संभल 1.15-1.20 लाख कुंदरकी 60-65 हजार
अमरोहा 40-45 हजार
रामपुर 30-35 हजार
मुरादाबाद देहात 18-23 हजार
ये बने तुर्क बिरादरी से विधायक
मुरादाबाद देहात सीट : यहां से रिजवानुल हक तीन बार विधायक चुने गए। उनके भाई शमीमुल हक दो बार विधायक बने जबकि रिजवानुल हक के बेटे उस्मान एक बार विधायक चुने गए।
कुंदरकी सीट : यहां से हाजी अकबर पांच बार विधायक बने। हाजी रिजवान भी तीन बार विधायक चुने गए। वहीं जियाउर्रहमान बर्क एक बार विधायक बने।
संभल सीट : यहां से डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क करीब चार बार विधायक चुने गए।
असमोली-चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में भी तुर्क
संभल की असमोली और रामपुर की चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में तुर्क वोटरों की संख्या ठीक-ठाक है। इन दोनों सीटों पर ये बिरादरी जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
भाजपा सहयोगी दलों का ले सकती है सहारा
मुरादाबाद मंडल की तुर्क प्रभावित सीटों पर भाजपा अपने सहयोगी दलों का सहारा ले सकती है। लगातार हार रही सीटों को सहयोगी दलों के सिंबल पर पार्टी प्रत्याशी उतार सकती है। इसमें मुस्लिम चेहरे भी हो सकते हैं। क्रिकेटर मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।