मॉक ड्रिल हादसे में मौत की दहलीज से लौटकर आई शिक्षिका श्रद्धा शर्मा को स्कूल और जिला प्रशासन दोनों ने भुला दिया है। जिला प्रशासन और सिविल डिफेंस की बदइंतजामी का शिकार हुई शिक्षिका अभी भी बिस्तर पर पड़ी हैं।
घटना के बाद अपनी - अपनी गर्दनें बचाने के लिए जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका को आर्थिक मदद देने और पूरा ख्याल रखने के दावे किए थे। लेकिन शिक्षिका के परिवार को चवन्नी की भी आर्थिक मदद नहीं दी गई है।
सिविल लाइंस स्थित आरआरके स्कूल में एक जून को सिविल डिफेंस की मॉक ड्रिल के दौरान सिविल डिफेंस के कर्ताधर्ताओं ने शिक्षिका श्रद्धा शर्मा को तीसरी मंजिल से छलांग लगवा दी थी। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छत से कूदी श्रद्धा रस्सी छूटते ही तीसरी मंजिल से छत से गिर पड़ी थीं। उनके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए थे और सिर में भी गंभीर चोट लगी थी। करीब पंद्रह दिनों तक श्रद्धा को अस्पताल में भर्ती रखा गया था।
शुरू में जब तक यह मामला सुर्खियों में रहा तब तक अधिकारियों के आने - जाने का सिलसिला शुरू रहा। लेकिन जैसे ही मामला ठंडा पड़ा अधिकारियों ने भी इस परिवार की ओर से नजरें फेर लीं। हादसे के बाद जिला प्रशासन ने शिक्षिका के परिवार से कहा था कि शासन से दस लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
आरआरके स्कूल प्रबंधन ने भी शिक्षिका की मदद करने का दावा किया था। लेकिन शिक्षिका के परिवार का कहना है कि जिला प्रशासन या स्कूल की ओर से आर्थिक मदद तो दूर, कोई हालचाल पूछने तक नहीं आया है। उधर, शिक्षिका श्रद्धा शर्मा हादसे के ढाई महीने बाद भी बिस्तर से उठने में असमर्थ हैं।