मुरादाबाद। पिछले 15 साल से मुरादाबाद में तैनात एसीएमओ डॉ. डीके प्रेमी के खिलाफ विधायक रितेश गुप्ता ने लेटर बम फोड़ा है। मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए शीघ्र कठोर से कठोर कार्रवाई करने के साथ उनका स्थानांतरण करने की मांग की है। पत्र में रितेश गुप्ता ने इस दौरान उनके द्वारा अर्जित संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की है।
विधायक ने अपने पत्र में लिखा है कि अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीके प्रेमी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और उनका कार्य व्यवहार जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति बेहद खराब है। पत्र में जिले के कस्बों में अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित किए जाने और उनसे लाखों रुपये प्रतिमाह अवैध रूप से लेकर संरक्षण देने जैसा संगीन आरोप लगाया गया है। पत्र में नोडल अफसर डॉ. प्रेमी द्वारा अप्रशिक्षित चिकित्सकों पर कार्रवाई करने के बजाय एक डॉक्टर से प्रति माह दो हजार रुपये की वसूली करने का भी आरोप है। विधायक ने लिखा है कि मेरे कहने के बाद भी अप्रशिक्षित चिकित्सकों पर कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं वे नए अल्ट्रासाउंड एवं रेडियोलॉजी सेंटर के पंजीकरण करने और एनओसी देने के एवज में एक से दो लाख रुपये लेने के बाद ही पंजीकरण करते हैं। आरोप यह भी है कि ऊपर से दबाव या शिकायत के बाद अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर पर दिखावे की कार्रवाई की जाती है और दो तीन दिन बाद मोटी रकम लेकर फिर से सेंटर चलने दिया जाता है। लिखा है कि डॉ. प्रेमी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों की अवैध संपत्ति अर्जित की है। वे वर्ष 2006 से कार्यरत हैं और अपने प्रभाव व साठगांठ से विभाग के कई महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से नोडल प्रभारी नियुक्त हैं। उनके द्वारा बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
2018 के बाद एक एक कर विभागों के नोडल बनते गए डॉ. प्रेमी
डॉ. डीके प्रेमी फरवरी 2018 से पहले सिर्फ जिला क्षय रोग अधिकारी थे। उनका दफ्तर टाउन हॉल कार्यालय में था। फरवरी 2018 में सीएमओ कार्यालय में कक्ष मिलने के बाद वे एक-एक करके विभाग के सारे कार्यों के नोडल अधिकारी बनते चले गए। अप्रशिक्षित चिकित्सकों की चेकिंग, हॉस्पिटल, नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन, एक्सरे अल्ट्रासाउंड रजिस्ट्रेशन, निर्माण कार्य, पुलिस भर्ती, मेडिकल, आयुष्मान भारत और जिला क्षय रोग अधिकारी, नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन के 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में डॉ. प्रेमी की प्रमुख भूमिका होती है। इतना ही नहीं जिला सर्विलांस अधिकारी के तौर पर कोरोना में सभी खरीद में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
जिले में ये भी हैं एसीएमओ पर विशेष जिम्मेदारी नहीं
जिले में डॉ. डीके प्रेमी के अलावा तीन और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं, जिनमें एक डॉ. ब्रह्म सिंह मेडिकल लीव पर चल रहे हैं। इनके अलावा डॉ. दीपक वर्मा और डॉ. जीएस मर्तोलिया भी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं, जिन पर सिर्फ चंद कार्यक्रमों की जिम्मेदारी है।
पत्र की बात समझ गया, लेकिन कोई कमेंट नहीं करूंगा : डॉ प्रेमी
एसीएमओ डॉ. डीके प्रेमी का कहना है कि वे न तो अप्रशिक्षित चिकित्सकों पर कार्रवाई के नोडल हैं और न ही अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर। अल्ट्रासाउंड के प्राधिकृत अधिकारी जिलाधिकारी हैं। संगीन आरोपों की बाबत उन्होंने माननीय पर कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया। बोले, विधायक के पत्र की बात समझ गया हूं।