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कुत्तों के बधियाकरण पर मेनका गांधी ने उठाए सवाल, कई कुत्तों की हुई मौत, सवालों के घेरे में नगर निगम प्रशासन

Tue, 02 Feb 2021 03:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
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भाजपा नेता मेनका गांधी - फोटो : amar ujala
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पशु प्रेमी एवं पूर्व मंत्री मेनका संजय गांधी ने कुत्तों के बधियाकरण को लेकर नगर निगम क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई स्थानों पर इसके नाम पर खेल किये जाने के मामले सामने आए हैं। इसके चलते तमाम कुत्तों की जानें भी गई हैं।
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ऐसा इसलिए हुआ क्योकि कई जगह नगर निगम के अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल के इस कार्य का ठेका उन एनजीओ को दे दिया जो इसके लिए अधिकृत ही नहीं थी। मेनका गांधी ने इस तरह की जिस एक समिति (एनजीओ) का जिक्र करते हुए सूचना मांगी है वह समिति लॉक डाउन के पहले तक जिले में काम करती रही है। इसके चलते यहां का नगर निगम प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है।

स्ट्रीट डॉग (गली के आवारा कुत्तों) की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम प्रशासन उनके बधियाकरण व टीकाकरण का कार्य कराता है। इसके लिए बाकायदा एडब्ल्यूबीआई (एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया) में पंजीकृत एनजीओ को ही इस कार्य का ठेका दिए जाने का प्रावधान है। सूत्र बताते हैं इसके बावजूद मुरादाबाद समेत कई स्थानों पर पहले इन मानकों को ताक पर रख कर एनजीओ को टेंडर दिए जाते रहे हैं।
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मेनका गांधी ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा इस तरह की एनजीओ नगर निगम के अधिकारियाें से साठगांठ कर कुत्तों के बधियाकरण का ठेका तो ले लेती हैं लेकिन उनके पास न तो कुशल चिकित्सक होते हैं न ही कुत्तों का उचित इलाज व भोजन ही उन्हें दिया जाता है। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि भिंड ऋषि पशु कल्याण समिति भी पहले प्रदेश की कई नगर निगम में ठेका लेती रही है।

यह एनजीओ काली सूची में डाली जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी सूचना मिल रही थी कि कुछ स्थानों पर निगम अधिकारियों से साठगांठ कर यह एनजीओ कुत्तों की जिंदगी के साथ अभी भी खिलवाड़ करने की कोशिश में लगी है। इसी संबंध में उन्होंने मुरादाबाद नगर निगम को भी पत्र भेज कर जानकारी चाही है। यही नहीं कुत्तों के बधियाकरण का ठेका देने से पहले जिले के पशु प्रेमियों, पशु चिकित्सकों की भी राय नहीं ली जाती। जबकि इन लोगों की एक मानीटरिंग कमेटी बनाकर ही टेंडर देना चाहिए।

मेनका गांधी का यह पत्र आने के बाद यहां भी नगर निगम प्रशासन में हड़कंप है। वजह यह है कि मेनका गांधी ने जिस भिंड ऋषि पशु सेवा समिति का जिक्र अपने पत्र में किया है वह एक साल पहले तक इस जिले में काम करती रही है। उसके कार्य को लेकर यहां भी सवाल उठते रहे हैं। उस समति को एक कुत्ते के बधियाकरण पर नगर निगम प्रशासन 840.62 रुपये प्रति पशु देता रहा है। हालांकि मार्च 2020 के बाद से यह समिति यहां काम नहीं कर रही है और वर्तमान नगर निगम की ओर से इसका ठेका तिरुपति फाउंडेशन को दिया गया है जिसे नगर निगम प्रति पशु 913 रुपये दे रहा है।

यह सही है कि यहां भिंड ऋषि पशु कल्याण समिति काम कर चुकी है। लेकिन उसका टेंडर मेरे आने से पहले का था। मेरी जब यह जानकारी में आया कि संबंधित समिति को काली सूची में डाला जा चुका है और वह एडब्ल्यूबीआई में पंजीकृत नहीं है तब मैंने उसकी जांच कराई और उसे हटाने के बाद दूसरी संस्था को नियमानुसार इसका ठेका दिया गया है। ठेका देने के दौरान पशु कल्याण समिति की भी संस्तुति ली गई है। वर्तमान में भिंड ऋषि पशु कल्याण समिति यहां काम नहीं कर रही है। इसकी जानकारी मेनका गांधी जी को भेजी जा रही है।
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संजय चौैहान, नगर आयुक्त
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