मुरादाबाद। एमडीए 28 फरवरी को आर्किटेक्ट्स की रैकिंग जारी करेगा। आरोप है कि कुछ आर्किटेक्ट्स अपने अनुभवहीन सहायकों पर पूरा काम छोड़ देते हैं। इस कारण नक्शों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। नक्शा पास नहीं होने पर लोग एमडीए के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं।
एमडीए के अधिकारियों का कहना है कि रैकिंग जारी होने से पता चलेगा कि कौन आर्किटेक्ट अच्छा कार्य कर रहा है। सही नक्शा बनाए जाने पर स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होगी। देरी के असली कारणों का राज खुलेगा। जनता को भी बेहतरीन आर्किटेक्ट चुनने का मौका मिलेगा। मनमानी और लापरवाही पर लगाम लगेगी। साथ ही भ्रष्टाचार और सांठगांठ की प्रवृत्ति में कमी आएगी। पहली रैंकिंग डेटा विश्लेषण के साथ 28 फरवरी को जारी की जाएगी।
निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए विभाग ने एक नई और अनूठी पहल शुरू की है। अब शहर के आर्किटेक्ट्स को उनके कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी। इस नई प्रणाली से आम जनता को अपने मकान, दुकान और व्यावसायिक भवनों के नक्शे बनवाने के लिए योग्य और कुशल आर्किटेक्ट चुनने में आसानी होगी।
नक्शा स्वीकृति में देरी के सही कारणों का पता चलेगा। सही नक्शा आने पर आर्किटेक्ट और अधिकारियों की लापरवाही की जांच करना आसान होगा। एमडीए उपाध्यक्ष शैलेष कुमार का कहना है कि बार-बार के त्रुटिपूर्ण इससे नक्शों की प्रस्तुति पर रोक लगेगी। कुछ आर्किटेक्ट्स बिना आवश्यक सुधार किए बार-बार वही नक्शा जमा कर देते हैं। फिर नक्शा स्वीकृति में देरी का दोष ऑनलाइन पोर्टल या एमडीए के अधिकारियों पर मढ़ दिया जाता है।
ऐसे तय होगी आर्किटेक्ट्स की रैंकिंग
एमडीए आर्किटेक्ट्स के पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा। इसके लिए ऑनलाइन नक्शा अनुमोदन डाटा को आधार बनाया जाएगा। देखा जाएगा कि कुल कितने नक्शे प्रस्तुत किए गए। स्वीकृत नक्शों की संख्या कितनी है। अस्वीकृत नक्शों की संख्या और उनके कारण क्या हैं। औसत स्वीकृति समय कितना था। बार-बार अस्वीकृति का कारण (गलत ड्राइंग, दस्तावेजों की कमी, स्वामित्व की त्रुटियां, एनओसी की अनुपलब्धता) तो नहीं है। रैंकिंग का निर्धारण आर्किटेक्ट्स के प्रदर्शन के आधार पर होगा। एमडीए कार्यालय पर रैंकिंग का प्रदर्शन किया जाएगा।