मुरादाबाद। मुरादाबाद में ताबड़तोड़ ढंग से हुए अवैध निर्माणों का खेल रोकने में एमडीए पूरी तरह फेल साबित हुआ है। गांगन क्षेत्र में 18 सौ से ज्यादा अवैध फैक्टरियों का जाल फैला है तो शहर के तमाम इलाके ऐसे हैं जहां 90 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण अवैध हैं। केवल फैक्टरियों की ही यदि एमडीए कंपाउंडिंग करे तो दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की आय हो सकती है पर सेटिंग के इस खेल में एमडीए अफसर नोटिसों से आगे ही नहीं बढ़ पाए। अब एमडीए की नई वीसी यशु रुस्तगी और सचिव सर्वेश कुमार गुप्ता केसामने यह चुनौती है कि वह कैसे इस पर अंकुश लगाएं।
प्राधिकरण अफसरों की मिलीभगत ने मुरादाबाद का स्वरूप ही बिगाड़ दिया। अनियोजित विकास बढ़ता चला गया और इसके रोकने को एमडीए ने कभी सार्थक कदम नहीं उठाया। हां, नोटिस देकर केवल दबाव बनाने का काम किया पर इससे आगे एमडीए अफसर नहीं बढ़ पाए। इसी का परिणाम रहा कि गांगन क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से फैक्टरियां बढ़ती ही चली गईं। यहां आज यह संख्या 18 सौ से ज्यादा हो गई है पर एमडीए इसे रोकने को कोई पहल नहीं कर पाया है।
यहां 90 प्रतिशत से ज्यादा अवैध निर्माण
वर्ष 1980 में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का गठन हुआ था। उद्देश्य था कि शहर को व्यवस्थित विकास दिया जाए। सुंदर शहर की परिकल्पना तब साकार होती जब एमडीए अपनी सीमा के भीतर अवैध निर्माणों को रोकता। ऐसा नहीं हो पाया और अवैध निर्माण होते गए। शहर के कटघर, गलशहीद, मुगलपुरा में 90 फीसदी से अधिक निर्माण अवैध है। एमडीए से मानचित्र स्वीकृत कराए बिना ही धड़ाधड़ निर्माण हुए। चूंकि यह निर्माण अनियोजित हैं तो इनमें न पार्क हैं और न सड़क, सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं है। ऐसे में विकसित शहर की अवधारणा ही दम तोड़ रही है।
अपनी सेटिंग की, एमडीए को दो हजार करोड़ का फटका
एमडीए अफसरों का ही अनुमान है कि यदि इस निर्माण को शमनीय किया जाता तो करीब दो हजार करोड़ रुपये काशुल्क एमडीए को अलग अलग मद में प्राप्त होता। दरअसल एमडीए अफसरों, अभियंताओं ने अपने सेटिंग की और एमडीए को यह फटका लगता चला गया।
बरात घरों से लेकर स्कूल कालेज तक अवैध
शहर में अवैध रूप से बनीं बड़ी-बड़ी फैक्टरियों के अलावा बरात घर, स्कूल, कालेज व अन्य कारखाने हैं। केवल रामपुर रोड पर ही करीब 200 फैक्टरी, संभल रोड पर 150 से ज्यादा फैक्टरियां एमडीए अधिकारियों के सामने ही डेवलेप हो गईं। करुला, इस्लाम नगर और ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां गांगन को पाटकर लोग प्लाटिंग करते रहे और एमडीए अधिकारियों ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की।
आठ हजार फाइलों पर जमा है धूल
एमडीए में अवैध निर्माणों की लगभग आठ हजार फाइलाें पर धूल जमी है। आलम यह है कि कई फाइलें तो सेटिंग से गायब तक हुई है। एमडीए इन सभी फाइलों का ब्योरा कंप्यूटरीकृत करने की बात कह रहा है पर अभी तक यह योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई है।
नए अधिकारियों का दावा, लगाएंगे अवैध निर्माणों पर अंकुश
इसी सप्ताह मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में दोनाें मुख्य अधिकारियों की नई तैनाती हुई है। श्रावस्ती की डीएम रहीं यशु रुस्तगी ने बतौर वीसी यहां ज्वाइन कर लिया है तो सचिव के रूप में सर्वेश कुमार गुप्ता ने कार्यभार संभाला है। दोनों के लिए इन पर काम करना चुनौती होगी। सोमवार को यशु रुस्तगी ने सभी विभागों की मीटिंग लेकर शहर की पूरी स्थिति को परखा और कहा कि अब सारी योजनाओं पर काम होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने नई शमन नीति लागू की है। देखें कि इसके तहत कितने निर्माणों को शमन किया जा सकता है। इस वर्गीकरण कर लें और जो इन नियमों में नहीं आ रहा है उस पर एक्शन करें।
- हमने अभी ज्वाइन किया है। वीसी ने भी सभी फाइलों का अवलोकन शुरू कर दिया है और विशेष रूप से उन्होंने अवैध निर्माणाें पर ही फोकस किया है। कहा है कि नई शमन नीति के तहत काम किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभाग पूरी तैयारी कर लें। जिन निर्माणों का शमन नहीं हो सकेगा उन पर एक्शन किया जाएगा। हम बिंदुवार इसकी योजना तैयार करेंगे और इस पर गंभीरता से काम होगा।
- सर्वेश कुमार गुप्ता, सचिव एमडीए