मुरादाबाद। अरबों रुपये के घोटालों के आरोपों से घिरी मायानगर सहकारी आवास समिति को भंग कर दिया गया है। यह कार्रवाई अपर आयुक्त आवास ने की है। समिति को संचालित करने के लिए अब डीएम अपर नगर मजिस्ट्रेट या तहसीलदार की नियुक्ति करेंगे।
मायानगर सहकारी आवास समिति के समिति के सदस्य शीशपाल की शिकायत पर तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच कराई गई। इस जांच में पता चला कि जमीन का काफी गोलमाल किया गया है। समिति के सदस्यों को बदलकर दूसरों को जमीनें बेची गई हैं। इसमें फर्जी डीड भी बनाए गए हैं। शुरुआती जांच में 100 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया था। जांच में छह स्थानीय प्रापर्टी डीलरों के नाम सामने आए। इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन अपर आयुक्त आवास एवं अपर निबंधन विनय कुमार मिश्रा ने समिति पर शिकंजा कसना शुरू किया। उनके निर्देश पर एआईजी स्टॉप ने समिति की जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी। साथ ही समिति के खातों को सशर्त फ्रीज कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद अपर आयुक्त आवास के निर्देश पर डीएम अनुज सिंह ने जमीनेां की ऑडिट करने के लिए एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी। इस बीच एडीएम प्रशासन गुलाब चंद्र का तबादला हो गया। इस कार्य की जिम्मेदारी अब वर्तमान एडीएम प्रशासन संगीता गौतम के कंधों पर है। वहीं अपर आयुक्त एवं निबंधन ने मायानगर सहकारी आवास समिति को भंग कर दिया। इस संबंध में बृहस्पतिवार को आवास विकास विभाग की ओर से जारी पत्र पहुंच गया। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि मायानगर सहकारी समिति भंग कर दी गई हैं। इस मामले में वह शीघ्र ही किसी तहसीलदार या अपर नगर मजिस्ट्रेट को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। अभी जमीन की ऑडिट रिपोर्ट पूरी नहीं हुई है। रिपोर्ट आने पर समिति के कुछ लोगों के खिलाफ विभाग की तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इधर वर्षों पहले रजिस्ट्री करा चुके लोगों को अभी तक प्लाट या फ्लैट भी नहीं मिल सका है।
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समिति के सभापति के खिलाफ पारित हुआ था अविश्वास प्रस्ताव
मुरादाबाद। घोटाले की प्राथमिक रिपोर्ट आने के बाद 10 अक्तूबर को समिति के सदस्यों ने विनायक अपार्टमेंट में बैठक की थी। इस दौरान मायानगर सहकारी समिति के सदस्यों ने अध्यक्ष फूलकुंवर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। इस मामले की जानकारी जिला प्रशासन को भी दी गई थी लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया था। इस मामले में अपर आयुक्त ने घोटालों के लिए समिति के पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए भंग करने का निर्णय लिया। अब जिला प्रशासन की तरफ से नियुक्त अध्यक्ष समिति का पूरा हिसाब लेंगे।