मुरादाबाद। मायानगर सहकारी आवास समिति का एक और फर्जीवाड़ा अंतरिम समिति के समक्ष आया है। आरोप है कि समिति के पूर्व सभापति और सचिव ने एक ही फ्लैट दो लोगों को आवंटित कर दिया। फ्लैट बेचने के लिए आवंटी विमलेश सिन्हा के नाम के आगे फ्लूड लगाकर पूनम का नाम चढ़ाया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट इस मामले की जांच कर रहे हैं।
चंद्रनगर सिविल लाइंस निवासी पंकज सिन्हा ने बताया कि उनकी मां विमलेश सिन्हा रिटायर्ड अध्यापिका हैं। वह 1981 से मायानगर सहकारी आवास समिति की सदस्य हैं। उन्होंने 2012 में विनायक अपार्टमेंट में जी- 42 फ्लैट आवंटित कराया था। इस मामले में उन्होंने एक लाख पांच हजार रुपये समिति में जमा किए थे। आवंटन के काफी दिनों बाद तत्कालीन सचिव ने फोन कर बताया कि उनका आवंटन निरस्त हो गया है। इस मामले में आपको हायर अथारिटी से बात करना होगा। रिटायर्ड अध्यापिका फोन सुनकर परेशान हो गईं। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र लगभग 82 हो गई है। भागदौड़ करना मुश्किल हो गया है। इस मामले में रिटायर्ड अध्यापिका ने सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय को प्रार्थनापत्र दिया। विमलेश सिन्हा के बेटे ने कागजात का निरीक्षण किया तो पाया कि उनकी मां के नाम पर फ्लूड लगाकर पूनम का नाम चढ़ाया गया है। इधर अलीगढ़ जिले के विष्णुपुरी निवासी पूनम पत्नी सुधीर कुमार ने भी सिटी मजिस्ट्रेट को एक शपथपत्र के साथ प्रार्थनापत्र दिया है। बताया कि उन्होंने 2017 में विनायक अपार्टमेंट में अपना फ्लैट जी - 42 बुक कराया था। उस समय सोसाइटी के अध्यक्ष एवं सचिव ने हस्तारित अस्थायी आवंटन पत्र एवं शेयर सर्टिफिकेट प्रदान किया था। 2017-208 के बीच उन्होंने चेकों के माध्यम से 13 लाख 9500 रुपये जमा किया था। उनका नाम सोसाइटी के मतदाता सूची में अंकित है। अभी तक करीब 18.44 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद फ्लैट की रजिस्ट्री और कब्जा नहीं मिल सका है। इस बारे में समिति के अंतरिम सचिव अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि दोनों लोगों ने शपथ पत्र दिया है। समिति के अंतरिम सभापति सिटी मजिस्ट्रेट इस मामले की जांच कर रहे हैं। पूर्व पदाधिकारियों ने दोनों आवंटियों के साथ जालसाजी की है।