अबुल कलाम आजाद
अबुल कलाम आजाद ने पहला लोकसभा चुनाव रामपुर से लड़ा। उन्होंने पहली लोकसभा के चुनाव में 108180 वोट पाए थे, जोकि 59.57 प्रतिशत थे। आजाद कांग्रेस के बड़े नेता थे। 1923 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने। 1940 और 1945 के बीच कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
- रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने। पहले लोकसभा चुनाव में बहुत कम प्रत्याशियों ने इतने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव इन प्रत्याशियों में अकेले ऐसे नेता हैं, जो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दो बार मुख्यमंत्री रहते हुए संभल से चुनाव लड़े। 1998 में संभल लोकसभा सीट से उन्हें 376828 वोट मिले, जोकि 50.04 प्रतिशत थे। 1999 में फिर संभल लोकसभा से उन्हें सांसद चुना गया।
- इस बार 259403 वोटों पर उन्होंने कब्जा किया, जोकि 41.85 प्रतिशत थे। मुलायम सिंह यादव 1996 में एचडी देवगौड़ा की सरकार में देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं।
मायावती
चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती के पास 1989 में बसपा में बड़ा पद नहीं था। उस समय कांशीराम पार्टी के अध्यक्ष थे। मायावती ने 1989 में बिजनौर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने 183189 वोट पाए और जनता दल के मंगलराम प्रेमी को हराया।
- मायावती को इस चुनाव में 37.96 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद उनका कद पार्टी में बढ़ता चला गया। आज वह बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
चौधरी भूपेंद्र सिंह
मुरादाबाद से ही ताल्लुक रखने वाले चौधरी भूपेंद्र सिंह ने 1999 में संभल लोकसभा सीट से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय उनके पास भाजपा में बड़ा पद नहीं था। वह जीत नहीं सके लेकिन पार्टी में उनका कद बढ़ता गया।
- चौधरी भूपेंद्र सिंह योगी सरकार के दोनों कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रहे। पंचायती राज विभाग संभाला। बाद में पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।
इमरान प्रतापगढ़ी
शायर इमरान प्रतापगढ़ी 2019 में कांग्रेस के लिए मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। उस समय पार्टी में उनके पास कोई पद नहीं था। इमरान को चुनाव में 59198 वोट मिले थे, जोकि 4.62 प्रतिशत थे। इमरान ने 2019 के चुनाव में भावुक होकर कहा था कि मैं बाहरी नहीं हूं।
- करारी हार के बावजूद कांग्रेस में उनका कद तेजी से बढ़ता चला गया। आज वह राज्यसभा सांसद हैं और कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
मुख्तार अब्बास नकवी
मुख्तार अब्बास नकवी ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1998 में रामपुर से लड़ा और 265116 वोट पाकर जीत गए। ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई मुस्लिम चेहरा भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनकर संसद पहुंचा हो। इसके बाद मुख्तार अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री बन गए। नकवी 2010 से 2016 तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे।
- 2014 की मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री बने। 2016 में उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला। मई 2019 में मोदी कैबिनेट में शामिल हुए और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बने।