जमीयत-ए-उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम मौलाना सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने किसी सरकार को हक नहीं है कि वह किसी के मजहबी कानून में दखलंदाजी करे। शरीयत में कोई भी दखल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समान नागरिक संहिता किसी भी दशा में मंजूर नहीं की जाएगी। सैयद मोहम्मद उस्मान पहली बार कुंदरकी में तशरीफ लाए थे। 13 नवंबर को अजमेर में प्रस्तावित जमीयत-ए-उलमा-ए-हिन्द के 33वेें आम अधिवेशन में मुस्लिम पारिवारिक कानून यानि मुस्लिम पर्सनल लॉ, दीन व ईमान का संरक्षण, कौमी व मिल्ली मामलों पर आपसी एकता, दलित और मुस्लिम एकता से संबंधित रणनीति, राष्ट्रीय एकता एंव सहिष्णुता कोे बढ़ावा देेने और अन्य महत्वपूर्ण मुुद्दों पर चर्चा होेगी।
मुसलमानों से अधिक से अधिक संख्या मेें अजमेर शरीफ पहुंचने की अपील की गई। इस मौके पर जमीयत के प्रदेश महासचिव मौलाना मोहम्मद मदनी, जिला सदर मुफ्ती बिलाल मौलाना मोहम्मद कासिम, मौलाना खालिक, नगर पंचायत चेेयरमैन मेहंदी हसन, शरीफ अहमद, अनीस कुरैशी रहे।