प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में संभल जिले की सोत नदी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमरोहा से शुरू होकर संभल होते हुए बदायूं तक बहने वाली नदी क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी के रूप में जानी जाती थी। इसका पानी किसानों के लिए खेती का मुख्य आधार था।
अतिक्रमण बढ़ने से यह विलुप्त हो गई थी
समय के साथ नदी का प्रवाह कम होने के साथ अतिक्रमण बढ़ने से यह विलुप्त हो गई थी। संभल के लोगों ने सोत नदी को भी पुनर्जीवित करने का संकल्प ले लिया। पिछले साल दिसंबर में नदी के कायाकल्प का काम 70 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने मिलकर शुरू किया।
लोगों की मेहनत रंग लाई
ग्राम पंचायतों के लोगों ने सरकारी विभागों को भी अपने साथ लिया। साल के पहले छह महीने में ही लोगों ने 100 किलोमीटर से ज्यादा रास्ते का पुनरोद्धार कर दिया। बारिश का मौसम शुरू हुआ लोगों की मेहनत रंग लाई और सोत नदी पानी से लबालब भर गई।
किसानों के लिए यह खुशी का एक बड़ा मौका बनकर आया है। लोगों ने नदी के किनारे बांस के 10 हजार से भी अधिक पौधे भी लगाए हैं, ताकि इसके किनारे पूरी तरह सुरक्षित रहें।
जिले में 112 किलोमीटर लंबी है नदी
संभल जिले की सबसे बड़ी सोत नदी स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयास से पुनर्जीवित हो गई है। इस नदी में बहता पानी किसानों को सुकून दे रहा है। विलुप्त हो चुकी करीब 112 किलोमीटर लंबी नदी को पुनर्जीवित किया जाना सराहनीय है।
करीब 40 वर्ष पहले तक सोत नदी जिले में किसानों के लिए फसल की सिंचाई का बड़ा आधार हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ यह नदी विलुप्त होती चली गई थी। यह नदी अमरोहा जिले के बॉर्डर से संभल जिले की ग्राम पंचायत धकतोड़ा से शुरू होकर बदायूं जिले तक मिलती है।
गंगा की सहायक नदी
इस नदी को गंगा नदी की सहायक नदी कहा जाता है। नवंबर 2022 से इस नदी को पुनजीर्वित करने का जिम्मा जिलाधिकारी मनीष बंसल ने उठाया था। उन्होंने राजस्व विभाग से जगह-जगह किए गए कब्जे हटवाए और पंचायतराज विभाग से कार्य कराया। यह नदी जिले के पांच ब्लॉक की 71 ग्राम पंचायतों से होकर गुजर रही है। हजारों किसानों के लिए सिंचाई के लिए बड़ा स्रोत है।