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भूल गए अहम सबक : कानपुर की घटना में बड़ी चूक, 30 विषयों की ट्रेनिंग में एनकाउंटर है सबसे प्रमुख

Tue, 07 Jul 2020 03:06 AM IST
Vikas Kumar अमित मुद्गल, मुरादाबाद
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डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी में पुलिस ट्रैनिंग - फोटो : amar ujala
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कानपुर की घटना में सबसे बड़ी चूक यह रही कि सिखाई गई सारी ट्रेनिंग को पुलिसकर्मी भूल गए। मुख्य रूप से सिखाए जाने वाले 30 विषयों में मुठभेड़ फील्ड क्राफ्ट टैक्टिस विषय का सबसे अहम हिस्सा है क्योंकि यह सीधा जीवन से जुड़ा है। डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी के अधिकारी मानते हैं कि प्रशिक्षण एवं मौके की स्थितियों में कई बार भिन्नता होती है पर सबक तो याद रखने ही चाहिए।

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प्रदेश की एकमात्र पुलिस अकादमी मुरादाबाद में है। यहां मुख्य रूप से डिप्टी एसपी और सब इंस्पेक्टरों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस समय भी यहां 42 डिप्टी एसपी और 221 सब इंस्पेक्टर ट्रेनिंग कर रहे हैं। अकादमी में  जांबाज पुलिसकर्मी तैयार किए जाते हैं। अभी आईपीएस प्रशिक्षुओं का बैच एक माह के लिए आने वाला है।

दो तरह के हैं प्रशिक्षण
एकेडमी के निदेशक एडीजी राजीव कृष्ण बताते हैं कि मुख्य रूप से दो तरह के प्रशिक्षण हैं। आउट डोर और इंडोर।  इन सभी विषयों में प्रशिक्षुओं को अपने योग्यता साबित करनी होती है। कड़े प्रशिक्षण और सभी विषयों की परीक्षा पास करने  के बाद ही पासिंग आउट परेड में शामिल होने का मौका मिलता है। उपाधीक्षक प्रशिक्षु 20 इंडोर तथा 10 आउटडोर जबकि उपनिरीक्षक 12 इंडोर और 12 आउटडोर विषयों के प्रशिक्षण लेते हैं।
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आउटडोर के विषय हैं ये
पदाति प्रशिक्षण
शस्त्र प्रशिक्षण
शस्त्र फायरिंग
शारीरिक दक्षता
यातायात नियंत्रण ड्रिल
भीड़ नियंत्रण या बलवा नियंत्रण
फील्ड क्राफ्ट टैक्टिस एवं जंगल ट्रेनिंग
अश्वारोहण
मोटर ड्राइविंग
तैराक

फील्ड क्राफ्ट टैक्टिस एवं जंगल ट्रेनिंग में होता है मुठभेड़ का प्रशिक्षण

इसमें फील्ड क्राफ्ट टैक्टिस एवं जंगल ट्रेनिंग सब्जेक्ट का महत्वूर्ण हिस्सा है मुठभेड़। अहम बात यह है कि पैरा मिलेट्री फोर्स के ही स्तर का है। इसमें सिखाया जाता है कि अचानक हुई मुठभेड़ या योजनाबद्घ तरीके से चलाया गया ऑपरेशन कितना अहम है और इसमें किस तरह से काम करना है। इसमें यह भी सिखाया जाता है कि परिस्थितियों के हिसाब से थोड़ा परिवर्तन मौकेपर किया जा सकता है पर सिखाए गए सबक को याद रखना महत्वपूर्ण है। जरा भी इससे हटे तो नुकसान हो सकता है। मुठभेड़ के दौरान आपकी योजना फूल प्रूफ होनी चाहिए। अचानक हुई मुठभेड़ का एक्शन अलग होता है और यदि दबिश टीम जा रही है तो इस दौरान होने वाली मुठभेड़ के लिए अलग से प्लान बनाया जाता है। 

यहीं चूक कर गए पुलिसकर्मी
इसी प्लानिंग और प्रशिक्षण के ककहरे को पुलिसकर्मी कानपुर में भूल गए। प्रशिक्षण सिखाता है कि दो तरह के एनकाउंटर होते हैं। पहला जिसमें कोई खतरनाक अपराधी पुलिस या सुरक्षाबलों की कस्टडी से भागने की कोशिश करता है। ऐसे में पुलिस को उसे रोकने या पकड़ने के लिए बल या असलहे का प्रयोग करना पड़ता है। दूसरा, जब पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने जाती है और वो पुलिस से बचने के लिए भागता है और ऐसे में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है। इसके अलावा किसी अपराधी द्वारा पुलिस पर हमला करने पर भी पुलिस एनकाउंटर कर सकती है। कानपुर में दूसरी तरह का एनकाउंटर था और पुलिस को इसकी पूरी तैयारी करनी थी। दंगा नियंत्रक वाहन के अलावा अतिरिक्त फोर्स ले जाना था। बुलेट प्रूफ जैकेट पहननी थी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ले जाने थे पर ऐसा नहीं किया गया।
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कोर्स में शामिल होगा कानपुर केस

कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की शहादत के इस एनकाउंटर को प्रशिक्षण के कोर्स में शामिल किया जाएगा। केस स्टडी के रूप में इसे पेश करने की तैयारी है। हालांकि यह तत्काल नहीं होगा। पहले वहां हुए इस एनकाउंटर का पूरा परिणाम सामने आ जाएगा। वहां सारी कार्रवाई हो जाएंगी तब इस पर यहां काम शुरू किया जाएगा।

सिलेबस बेहतरीन, पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं : राजीव कृष्ण
कानपुर की घटना पर सीधे सीधे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं क्योंकि उस पर वहां केआला अधिकारी मंथन कर रहे हैं। मैं मौके पर नहीं गया हूं। स्टडी नहीं की है तो सीधे नहीं कहा जा सकता है कि वहां ये कैसे हुआ। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस अकादमी का सिलेबस बहुत ही अच्छा है। चूंकि यह नूतन है।  उपनिरीक्षकों का सिलेबस दिसंबर 2018 तथा उपाधीक्षकों का मार्च 2018 में ही बदला गया है। चूंकि नित नए बदलाव हो रहे हैं ओर इस कोर्स में भी एडवांस स्टडी शामिल की गई है तो इसे तत्काल बदलने या इस पर पुनर्विचार की अभी कोई आवश्यकता नहीं है। काफी मंथन के बाद एक कमेटी इस सिलेबस को फाइनल करती है। एकेडमी निदेशक इसके अध्यक्ष होते हैं। यहां फैकल्टी भी इस समय अच्छी है और दिल्ली तक से बुलाए गए एक्सपर्ट पढ़ा रहे हैं। सिखा रहे हैं। कई बार परिस्थितियां कुछ और होती है और योजना कुछ और। ऐसे में आपरेशन के समय क्या निर्णय लेना है यह भी सिखाया जाता है। थ्योरी के साथ साथ परिस्थितियों के प्रैक्टिकल का मिश्रण ही आपरेशन को सफल बना देता है। कानपुर की घटना में यह देखना होगा कि कहां चूक हुई।
-राजीव कृष्ण, एडीजी  एवं निदेशक डा. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादम
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