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सांसद के सिपाही दरकिनार, महेंद्र की ताजपोशी

Thu, 28 Apr 2016 12:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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मोदी भाजपा
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जिलाध्यक्ष के चुनाव में मुंह की खाने के बाद सांसद कुंवर सर्वेश सिंह को अब महानगर अध्यक्ष के चुनाव में भी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। सांसद के सिपहसालारों संजय कट्टा और धर्मेंद्र नाथ मिश्रा को नजरंदाज करते हुए भाजपा हाईकमान ने महानगर अध्यक्ष पद पर क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और रितेश गुप्ता गुट के नजदीकी महेंद्र गुप्ता की ताजपोशी कर दी है।
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प्रदेश नेतृत्व की ओर से बुधवार को देर शाम हुए इस ऐलान के बाद से सांसद खेमे में निराशा है। वहीं सांसद कुंवर सर्वेश सिंह ने फिलहाल खुद को बेटे की शादी में व्यस्त बताकर इस पर कुछ बोलने से इंकार कर दिया है।

मुरादाबाद में भाजपा के दो खेमे माने जाते हैं। इनमें से एक सांसद कुंवर सर्वेश सिंह की अगुवाई में है तो दूसरे खेमे को क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह व उनके करीबी माने जाने वाले महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता का संरक्षण हासिल है। जिलाध्यक्षी की जंग में भी दोनों गुट आमने सामने थे।
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संघ से नजदीकियां रखने वाले भूपेंद्र और रितेश गुट ने हरिओम शर्मा की जिलाध्यक्ष पद पर ताजपोशी को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था तो दूसरे गुट ने इस बात पर पूरी ताकत लगा दी थी कि कोई भी हो पर हरिओम मंजूर नहीं हैं। लेकिन इस जंग में भी भूपेंद्र गुट को कामयाबी मिली थी।

इधर, महानगर अध्यक्ष पद की जंग भी भूपेंद्र खेमे ने जीत ली है। बुधवार शाम को प्रदेश अध्यक्ष केशव कुमार मौर्य ने महेंद्र गुप्ता के नाम पर मोहर लगा दी। महेंद्र गुप्ता लाइनपार में रहते हैं और अभी तक रितेश गुप्ता की ‘कैबिनेट’ में महामंत्री हुआ करते थे। महेंद्र गुप्ता के अलावा पांच अन्य नेता भी महानगर अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल थे।

इनमें से संजय कट्टा और धर्मेंद्र नाथ मिश्रा को सांसद का करीबी माना जाता है। पुराने भाजपाइयों में उमेश त्रिवेदी ने भी महानगर अध्यक्ष बनने की इच्छा जताई थी तो नत्थूराम कश्यप और दिनेश सिसौदिया भी रेस में शामिल थे। लेकिन बाकी सभी की दावेदारी को दरकिनार करके नेतृत्व ने महेंद्र गुप्ता को महानगर अध्यक्ष बना दिया है।

रितेश गुप्ता ने महेंद्र की ताजपोशी पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने एक जुझारू, निष्ठावान और पात्र कार्यकर्ता में भरोसा जताया है। उधर, इस फैसले से ब्राहम्मण खेमा भी नाखुश है। पार्टी के ब्राहम्मण खेमे का तर्क है कि जब मेयर और महानगर अध्यक्ष एक ही बिरादरी से आएंगे तो उन्हें कहां स्थान मिलेगा। ये खेमा इस तर्क और 2017 के टिकट की जंग में बिरादरी समीकरण के नाते उठाने की कवायद में जुट गया है।
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