मुरादाबाद। कौमार्य प्रमाणपत्र मांगकर विवादों में घिरे मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात को नवंबर माह में हुई तीन करोड़ की फंडिंग की जांच होगी। अभी तक की जांच में तीन साल के दौरान छह ट्रांजक्शन संदिग्ध पाए गए हैं। इस मामले में जांच कमेटी मदरसा संचालक से पूछताछ करेगी। साथ ही बैंकों से रिकॉर्ड मांगे गए है।
पाकबड़ा के लोधीपुर राजपूत स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के प्रबंधन पर छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के आरोप की जांच के दौरान विदेशी फंडिंग का मामला भी सामने आया। इसके बाद डीएम अनुज सिंह ने एमडीएम प्रशासन के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने मदरसा प्रबंधक से तीन साल सा ब्यौरा मांगा था। चार खातों की जांच में कमेटी के हाथ कुछ खास नहीं लगा। इस मामले में एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने मदरसा संचालक से पैन कार्ड मांगकर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पाया गया कि मदरसे को तीन करोड़ रुपये की फंडिंग नवंबर में हुई है। इसके साथ ही छह ट्रांजक्शन का पता नहीं चल रहा है कि कहां से पैसे आए और कहां गए हैं। कमेटी में शामिल मुख्य कोषाधिकारी रेनू बौद्ध, एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह और एडीएम सिटी इस मामले में शीघ्र बैठक करेंगे।
एडीएम प्रशासन संगीता गौतम का कहना है कि अभी जांच जारी है। इस मामले में अभी 13 साल पहले का ब्यौरा नहीं मंगाया गया है। इधर मदरसा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में चार्जशीट लगाने की तैयारी चल रही है।