मुरादाबाद। मदरसे में दाखिला देने से पहले 13 वर्षीय छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के मामले में एक आरोपी गिरफ्तारी के बाद पुलिस के कदम ठिठक गए। पुलिस अब तक न तो पूरे स्टाफ से पूछताछ कर सकी और न ही अन्य छात्राओं के बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि मदरसे की प्रधानाचार्य रहनुमा मेडिकल अवकाश पर हैं और दो दिन से विवेचक भी कोर्ट में व्यस्त रहे हैं।
चंडीगढ़ के मनीमाजरा क्षेत्र निवासी एवं टेलर का काम करने वाले व्यक्ति ने शुक्रवार को पाकबड़ा थाने में मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात की प्रधानाचार्य रहनुमा, एडमिशन सेल के प्रभारी मो. शाहजहां और अन्य स्टाफ के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में अपनी बेटी का मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात में कक्षा सात में दाखिला कराया था।
बेटी ने सातवीं पास कर ली और इस बार आठवीं कक्षा में दाखिला होना था। 16 जुलाई को वह बेटी को चंडीगढ़ ले गए। उनकी पत्नी 21 अगस्त को बेटी के साथ मदरसा पहुंची थीं। आठवीं कक्षा में दाखिला करने के लिए प्रधानाचार्य रहनुमा और एडमिशन सेल प्रभारी मो. शाहजहां से मिलीं थीं आरोप है कि दोनों ने पहले 35 हजार जमा करा लिए और इसके बाद छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने लगे थे। मेडिकल रिपोर्ट न देने पर उनके साथ मदरसा स्टाफ ने अभद्रता की और धक्के देकर उन्हें बाहर निकाल दिया था। पुलिस ने बिहार के पूर्णिया जिले के रानी पत्रा थानाक्षेत्र के पुरखरिया निवासी एडमिशन सेल के प्रभारी मो. शाहजहां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सीओ हाईवे राजेश कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है। छात्रा और उसके पिता के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने अपने बयानों में दो ही नाम बताए हैं। इनमें से एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है जबकि दूसरे आरोपी की तलाश की जा रही है।