मुरादाबाद। श्री झारखंडी मंदिर नागफनी मुरादाबाद में आयोजित श्री शिव महापुराण सप्ताह के दूसरे दिन कथाव्यास आचार्य धीरशांत अर्द्धमौनी ने कहा कि धर्महीन स्त्री व पुरुषों की तो बुद्धि ही इतनी विकृत हो जाती है कि जहां दुखों का नाश होना है वहां भी नहीं जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिनसे दुखों का नाश होता है उनसे ईर्ष्या, द्वेष करके मनुष्य अपना जीवन ही दुखमय करके रोते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान हरिहर ही समस्त सृष्टि के पालनहार हैं। महादेव शिव तो ज्योतिष अर्थात प्रकाश स्वरूप ही हैं। ब्रह्मा जी से लेकर अन्य ऋषियों, देवताओं, शास्त्रज्ञ, विद्वान, भक्तिमान, सत्पुरुषों को तो समय-समय पर भगवान की महिमा का दर्शन होता ही है। जिन्होंने शिव की महिमा का दर्शन किया है यदि वह भी उनकी किंचित महिमा को अपार स्वरूप से जानते हैं। जिस स्त्री और पुरुष ने शास्त्रों पर, गुरु पर, ब्राह्मणों पर थोड़ा से विश्वास किया है वह भला बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा को कितना जान सकेंगे।
उन्होंने कहा कि सृष्टि के उत्पन्न कर्ता-धर्ता तो ब्रह्मा हैं। भगवान नारायण ने ब्रह्मा के हृदय में अंगों सहित वेदों को स्थापित किया है। ब्रह्मा जी से अधिक भगवान के माहात्म्य को जानने वाले इस सृष्टि में होते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शरीर है तब तक दुखों की परंपरा समाप्त नहीं होती है। कोई न कोई तो दुख बना ही रहता है। एक सामान्य स्त्री पुरुषों के लिए सहज ही मुक्ति के द्वार सर्वत्र विद्यमान हैं। शास्त्रों में कहे गए धर्म का पालन करते हुए उपासना, भक्ति तथा जप-तप करते हुए अपने इसी मनुष्य जीवन में ही मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। इस मौके पर महंत भोलानाथ, उप महंत अमित नाथ बोबी, उपमहंत अंकित नाथ, पंडित जगदंबा प्रसाद वशिष्ठ, नरेंद्र सुमन, कमल गोयल, नमन गोयल, इंद्रजीत शर्मा, सुधा शर्मा आदि मौजूद रहे। ब्यूरो