मुरादाबाद। साइबर ठगों ने अब आईआरसीटीसी की वेबसाइट के नाम को भी ठगी के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया है। उसके नाम से मेल खाती वेबसाइट बनाकर यात्रियो से लूट की जा रही है। मुरादाबाद रेल मंडल में जनवरी और फरवरी में ऐसे 24 मामले पकड़ में आए हैं। ऐसे में यदि आप होली के लिए अपना टिकट बुक कर रहे हैं तो सावधानी बरतें और आधिकारिक वेबसाइट या एप्लीकेशन से ही टिकट बुकिंग करें।
आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेट अभय प्रताप का कहना है कि होली और दीपावली के मौके पर ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है। ऐसे में फर्जी एंजेट अधिक सक्रीय हो जाते हैं और कंफर्म टिकट के नाम पर भी लोगों से वसूली करते हैं। ये लोग आईआरसीटीसी की वेबसाइट में एक या दो शब्दों को बदलकर या अतिरिक्त शब्द जोड़कर फर्जी वेबसाइट बना लेते हैं। आश्चर्य की बात यह है इनकी वेबसाइट पर ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान का समय, वेटिंग लिस्ट सब कुछ दिखाई देता है। इससे यात्री इनके झांसे में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट का कहना है कि तत्काल टिकट में भी ये एजेंट सेंध लगाते हैं।
केस -1
हरिद्वार में पुरुषार्थी बाजार के समीप एक साइबर कैफे में फर्जी टिकटों का खेल चल रहा था। आरोपी ने न सिर्फ फर्जी वेबसाइट बनाई बल्कि आईआरसीटीसी की एक आईडी से कई टिकट बुक किए। आरपीएफ की साइबर सिक्योरिटी टीम ने आरोपी को उसकी दुकान से गिरफ्तार किया और लैपटॉप आदि जब्त कर लिया। इसके अलावा दो और मामले हरिद्वार में पकड़े गए हैं।
केस-2
हरदोई में एक व्यक्ति जन सुविधा केंद्र के नाम पर फर्जी टिकटों की दलाली कर रहा था। रेलवे के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने इसका पता लगाया और आरपीएफ ने मौके से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अभय प्रताप का कहना है कि ऐसे मामलों में भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
केस-3
गजरौला में दो मामले फर्जी टिकटिंग के पकड़े गए हैं। यहां आईटी सोल्यूशन का कार्य करने वाला एक शख्स फर्जी वेबसाइट बनाकर रेल यात्रियों को चूना लगा रहा था। जबकि दूसरे ने आईआरसीटीसी की अपनी ओरिजनल आईडी से कई टिकट बुक किए और फिर उन्हें मंहगे दामों पर बेचा। दोनों को आरपीएफ की टीम ने फरवरी माह में गिरफ्तार कर लिया।
रेलवे के सॉफ्टवेयर में सेंधमारी
कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं कि जिस सीट पर यात्री की बुकिंग थी, जब वह उस सीट पर पहुंचा तो वहां कोई दूसरा यात्री बैठा मिला। दोनों के पास एक ही सीट का टिकट था। इसे लेकर बहस हुई तो टीटीई ने दोनों के टिकट चेक किए। इसमें पाया गया कि उनमें से एक यात्री का टिकट फर्जी है। ऐसे मामले में यात्रियों को भी जुर्माना देना पड़ रहा है। साथ ही फर्जी टिकट बेचने वाले दलालों को पकड़ने के लिए आरपीएफ ने हर शहर में अपनी टीम तैनात कर रखी है। लेकिन ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ठगों के पास रेलवे की ट्रेनों और सीटों से संबंधित जानकारी कैसे पहुंचती है। ये इस ओर भी सवाल खड़े करता है कि कहीं न कहीं रेलवे के सर्वर की फायरबॉल सुरक्षा कमजोर तो नहीं है।
वर्जन
ऑनलाइन टिकट बुक करते समय सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आईआरसीटीसी की असली वेबसाइट से ही बुकिंग करें। जो यात्री रेलवे स्टेशन पर आकर विंडो से टिकट खरीद सकते हैं, वे आनलाइन बुकिंग से बचें। कोई समस्या होने पर तत्काल 139 पर कॉल करें। यदि मजबूरी में एजेंट से टिकट खरीदना पड़े तो जांच लें कि वह अधिकृत है या नहीं।
- रेखा शर्मा, सीनियर डीसीएम
ये है असली वेबसाइट -
https://www.irctc.co.in/