नवाब फैजुल्लाह खां द्वारा बसाए गए रामपुर की गिनती तहजीब के शहरों में होती है। जरी-जरदोजी, प्लाईवुड, चीनी मिट्टी व कपड़ों के लिए पहचान रखने वाले रामपुर को नई पहचान आजम ने दी है? वे यहां से नौ बार विधायक चुने गए हैं। 1980 के बाद से कोई ऐसा इलेक्शन नहीं है, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी न रही हो। 2004 में नवाब परिवार की नूर बानो की सियासी काट के लिए वे अभिनेत्री जयाप्रदा को चुनाव लड़ाने रामपुर लाए थे। हालांकि, जल्द ही जयाप्रदा व उनके सियासी गुरु अमर सिंह से आजम की खटपट शुरू हो गई। 2009 आते-आते आजम सपा से बाहर थे व जया उनके विरोध के बावजूद रामपुर से सांसद चुनी गईं। तब सपा से थीं, अब भाजपा प्रत्याशी के रूप में आजम से मुकाबिल हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा का चुनाव अभियान संभालने वाले अमर की रामपुर में एंट्री प्रचार के अंतिम दौर में हुई है।
मौलाना अबुल कलाम थे पहले सांसद
रामपुर सीट से 1952 में पहली बार मौलाना अबुल कलाम आजाद सांसद चुने गए थे। वे देश के पहले शिक्षा मंत्री थे। यहां से कांग्रेस को 10 बार, भाजपा को तीन, सपा को दो व भारतीय लोकदल को एक बार सफलता मिली है। लंबे समय बाद यह पहला मौका है जब नवाब परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है। इस परिवार के जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां यहां से पांच बार और उनकी पत्नी नूर बानो दो बार सांसद रही हैं। 2014 में उनके बेटे नवाब काजिम अली खां कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में तीसरे स्थान पर रहे थे।
तीन विधानसभा सीट सपा की, दो भाजपा के पास
रामपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीट हैं। इनमें रामपुर, स्वार व चमरौवा सपा के पास हैं तथा बिलासपुर व मिलक से भाजपा के विधायक हैं। रामपुर से खुद आजम खां और स्वार से उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां विधायक हैं।
2014 का लोकसभा परिणाम
प्रत्याशी मिले मत
नैपाल सिंह (भाजपा) 3,58,616
नसीर अहमद खान (सपा) 3,35181
काजिम अली खां (कांग्रेस) 1,56,466
अकबर हुसैन (बसपा) 81006
51% वोटर मुस्लिम हैं रामपुर में
रामपुर सीट का समीकरण भाजपा के बहुत मुफीद नहीं है, फिर भी 2014 में भाजपा के डॉ. नैपाल सिंह ने सपा के नसीर अहमद खां को 23 हजार मतों से हराया था। 1991 और 1998 में भी भाजपा इस सीट को जीत चुकी है। रामपुर में करीब 51 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं। भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा को परंपरागत वोटों के साथ ही मुस्लिम व दलितों में सेंधमारी की उम्मीद है। गठबंधन को मुस्लिमों के साथ 9 फीसदी जाटव व 3 फीसदी यादव वोटरों का भरोसा है। कांग्रेस ने बिलासपुर से दो बार विधायक रहे अजय कपूर को प्रत्याशी बनाया है। उन्हें कांग्रेस के परंपरागत मतों के साथ ही आजम विरोधी मुस्लिम वोटों का भरोसा है।
1996 से अब तक के सांसद
1996 बेगम नूरबानो कांग्रेस
1998 मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा
1999 बेगम नूरबानो कांग्रेस
2004 जयाप्रदा सपा
2009 जयाप्रदा सपा
2014 डॉ. नैपाल सिंह भाजपा
संसदीय सीट के लोगों की मिली-जुली है राय
सिविल लाइन्स रामपुर निवासी वीर खालसा सेवा दल सेवा समिति के अध्यक्ष सरदार अवतार सिंह कहते हैं कि आजम खां और जयाप्रदा के बीच सीधा चुनाव है। कांग्रेस के संजय कपूर तीसरा कोण बनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि आजम खां की टिप्पणियों से जयाप्रदा को महिलाओं की सहानुभूति का लाभ मिल सकता है। बिलासपुर क्षेत्र के कैमरी निवासी ट्रांसपोर्टर राजा व जमील अहमद को आजम खां की जीत में संदेह नही दिखता है। बिलासपुर के साहूकारा मुहल्ले में दुकान चलाने वाले शैलेन्द्र शर्मा को लगता है कि संजय कपूर को स्थानीय होने का लाभ मिलेगा। मिलक के शाहनवाज और पवन कुमार की राय क्रमश: आजम खां व जयाप्रदा के पक्ष में है।
टक्कर होगी लेकिन जीतेंगे आजम
पहाड़ी गेट पर रात में चाय पर चुनावी चर्चा में मशगूल जौहर यूनिवर्सिटी से बीकॉम करने वाले कासिम इकबाल कहते हैं कि जयाप्रदा से टक्कर है लेकिन जीतेंगे आजम खां। रजा डिग्री कॉलेज से पीजी कर रहे मुर्तजा कहते हैं कि आजम खां का कुछ लोगों में विरोध भी है लेकिन वह रामपुर की पहचान हैं। नौ बार के विधायक हैं, उन्होंने विकास कराया है। शाहाबाद गेट के आदिल भी उनसे इत्तेफाक जताते हैं। प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करने वाले शिवशंभू सिंह भाजपा की पैरोकारी करते हैं। बिलाफिर गेट निवासी जुनेद को लगता है कि जयाप्रदा के आने से मुकाबला रोचक हो गया है। उन्हें आजम का पलड़ा भारी लगता है।