मुरादाबाद। ट्रेनों में दुर्घटनाएं रोकने के लिए अब इंजन को नई तरह से तैयार किया गया है। इंजन में बैठे लोको पायलट को अब हर मिनट इंजन के संचालन पैनल पर कोई न कोई गतिविधि करनी पड़ेगी। नहीं तो इंजन खुद-ब-खुद बंद हो जाएगा। लोको पायलट को नींद न आए और हर तरह की दुर्घटना से बचा जा सके उसके लिए ऐसा किया गया है।
कई दुर्घटनाएं लोको पायलट की एक जरा सी झपकी से हो जाती है। ऐसे में लोको पायलटों की नींद पर रेलवे की पैनी नजर है। ट्रेनों के इंजन में इस प्रकार की डिवाइस लगाई गई है जिससे लोको पायलट दो मिनट की झपकी भी नहीं ले सकेंगे। हर मिनट पर कोई न कोई गतिविधि उन्हें करनी ही होगी। ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से यह उपकरण लगाए गए हैं। इससे ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन में सहायता मिलेगी। इसके अलावा ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस भी लगाई गई है।
नवंबर की शुरुआत के साथ ही कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। इन दिनों न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और वातावरण में धुंध भी है। ऐसे में खराब मौसम का प्रभाव ट्रेनों पर भी पड़ा है। इसके चलते ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 75 किमी प्रति घंटा निर्धारित कर दी गई है। हालांकि मुरादाबाद मंडल में पटरियों की क्षमता 110 किमी प्रति घंटा की है लेकिन कोहरे के कारण यह संभव नहीं हो सकेगा। लॉकडाउन के बाद साफ रूट और ट्रैफिक लोड कम होने के कारण जो ट्रेनें निर्धारित समय से आधा घंटा पहले ही गंतव्य तक पहुंच रही थीं वे अब लेट होने लगेंगी। रेल प्रशासन का कहना है कि फॉग सेफ्टी उपकरण मौसम की स्थिति और प्रत्येक सिग्नल की सूचना लोको पायलट को देगा, इन सूचनाओं के अनुकूल ही ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा।
ऐसे काम करती है फॉग सेफ्टी डिवाइस
फॉग सेफ्टी डिवाइस एक ऐसा उपकरण है जिसे ट्रेनों के इंजनों में लगाया जाता है। इससे लोको पायलट को सिग्नल और ट्रैक पर हर प्रकार के गतिरोध की जानकारी आडियो-वीडियो प्रणाली के जरिये मिलती रहती है। जैसे ही ट्रेन एक स्टेशन को क्रॉस करती है, लोको पायलट को अगले स्टेशन की दूरी की जानकारी मिलने लगती है। इस डिवाइस के द्वारा करीब एक किलोमीटर पहले ही सिग्नल, रेलवे फाटक और रेलवे स्टेशन की जानकारी मिल जाती है। जीपीएस एंटीना और बैट्री युक्त यह डिवाइस अधिक कोहरा होने पर लोको पायलट को ट्रेन की गति नियंत्रित करने की सूचना भी देती है।
चटकी हुई पटरी के कारण होते हैं हादसे
कोहरे को दुर्घटनाओं की बड़ी वजह माना जाता रहा है लेकिन ट्रेनों के मामले में इससे बड़ी वजह पटरियों का टूटना या चटकना है। दरअसल ठंड के मौसम में पटरियां चटकने की घटनाएं आम हैं। अक्तूबर माह में ही मुरादाबाद मंडल के सीतापुर-शाहजहांपुर सेक्शन में चटकी हुई पटरियों के सात केस मिले। चटकी पटरियों के कारण ट्रेन के बेपटरी होने का खतरा बना रहता है। रेल प्रशासन का कहना है कि रात के समय रेलवे स्टाफ को पेट्रोलिंग ड्यूटी पर लगाया गया है, जिससे समय रहते चटकी पटरियों की मरम्मत कराई जा सके।
मुरादाबाद मंडल में चलने वाली सभी ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाई गई हैं। कोहरे के कारण दुर्घटनाएं न हों और लोको पायलट को प्रत्येक स्थिति की सटीक जानकारी मिल सके। इस उद्देश्य से यह डिवाइस लगाए गए हैं। इसके अलावा लोको पायलट को ट्रेन के परिचलान के समय गतिविधि करना अनिवार्य है।
- भारत भूषण, सीनियर डीएमई, उत्तर रेलवे