कोरोना काल में बुजुर्गों में कोरोना संक्रमण के खतरे के साथ अल्जाइमर (डिमेंशिया) की संभावनाएं भी बढ़ गईं हैं। अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। बढ़ती उम्र के साथ अनिंद्रा इसकी मुख्य वजह है। कोरोनाकाल में बुजुर्गों का दिन का चैन और रात की नींद उड़ी हुई है।
मानसिक तनाव से बुजुर्ग भरपूर नींद नहीं ले पा रहे हैं। दिमाग में प्रोटोन की झल्ली बनने से अल्जाइमर के शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों के मुताबिक अल्जाइमर उम्र के साथ होने वाली लाइलाज बीमारी है। भरपूर नींद लेने और नियमित अखबार पढ़ने से दिमागी एक्साइज होने से इससे बचा जा सकता है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. प्रवीण शाह बताते हैं कि अल्जाइमर की समस्या 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को होने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। इसमें शारीरिक रूप से कोई परेशानी नहीं होती है। दिमागी तौर पर भूलने और सोचने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका असर दिनचर्या पर पड़ता है। डा. शाह बताते हैं उनकी खुद की रिश्तेदारी में दो महिलाएं इससे पीड़ित हैं। एक 90 वर्षीय वृद्धा परिवार के सदस्यों को पहचान तक नहीं पातीं हैं।
एपेक्स अस्पताल के मनोचिकित्सक दिशांतर गोयल बताते हैं, बढ़ती उम्र और अनिंद्रा कई बीमारियों की वजह बनती है। अल्जाइमर भी इन्हीं में एक है। उम्र के साथ जैसे कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं और मांशपेशियां कमजोर होती हैं उसी तरह दिमाग भी कमजोर होने लगता है। इससे भूलने की समस्या आने लगती है। कोरोनाकाल में बुजुर्गों का अधिक ध्यान रखने की जरूरत है। समय से दवा और भरपूर नींद लेनी जरूरी है।
डा. दिशांतर बताते हैं कोरोनाकाल में लोगों से मेलजोल कम होने से भी दिमाग का यूज कम हुआ है। दिमाग को व्यस्त रखना जरूरी है। इसके लिए अखबार पढ़ना जरूरी है। अखबार नियमित पढ़ें। पहले पन्ने से लेकर आखिरी पन्ने पर क्या-क्या खबरें पढ़ीं, उसका मूल्यांकन करें। चेस खेलें। इससे दिमाग की एक्साइज होगी और अल्जाइमर का खतरा कम होगा।
टीएमयू की मनोचिकित्सक डा. प्रेरणा गुप्ता बताती हैं, अल्जाइमर मनोभ्रंश का सबसे आम रूप है। इसमें टाऊ प्रोटीन न्यूरॉस में न्यूरोफिब्रिलरी टंगल्स बनाता है। बढ़ती उम्र के साथ धूम्रपान, अनिंद्रा, मधुमेह, ह्दय रोग, अवसाद और पारिवारिक पृष्ठभूमि भी इसकी वजह बनती है। पीड़ित का इलाज नहीं है। कोरोनाकाल में बुजुर्गों की देखभाल करने की जरूरत है।
अल्जाइमर के मुख्य लक्षण
- याददाश्त कमजोर होना और सोचने की क्षमता में कमी आना
- नंबर जोड़ने और घटाने, छोटी सी समस्या होने पर उलझ जाना
- व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव आना
- भूलने से दैनिक कार्यों को ठीक से नहीं कर पाना