मुरादाबाद के नागफनी थाना इलाके के जिगर कॉलोनी बंगला गांव निवासी अधिवक्ता शौकीन अली (53) की हत्या कर दी गई। वह रविवार शाम छह बजे से गायब थे। सोमवार सुबह साढ़े दस बजे उनका शव मझोला क्षेत्र में चौहानों वाली मिलक स्थित गोशाला के पास कुएं में पड़ा मिला। पुलिस ने बेटे की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नुकीली चीज और पत्थर से सिर पर हमला कर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई।
मुरादाबाद के अधिवक्ता शौकीन अली सिविल से जुड़े मामलों की कोर्ट में पैरवी करते थे। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया है कि वह वकालत के अलावा प्रॉपर्टी का काम करते थे। पुलिस टीम कई एंगल पर जांच पड़ताल में जुटी है। पुलिस यह भी देख रही है कि किसी मुकदमे की पैरवी की रंजिश में इस हत्याकांड को अंजाम तो नहीं दिया गया है।
इसके अलावा पुलिस यह भी देखा जा रहा है कि किसी प्रॉपर्टी को लेकर अधिवक्ता की किसी व्यक्ति से दुश्मनी तो नहीं चल रही थी। इसके अलावा पुलिस यह भी देख रही कि अधिवक्ता चतरपुर गांव निवासी थे। पैतृक गांव में तो उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है। पुलिस अधिवक्ता के मोबाइल की लोकेशन निकलवा रही है। जिससे साफ हो जाएगा कि अधिवक्ता किसकी कॉल पर वहां पहुंचे थे।
पुलिस ने घटनास्थल के आस पास भी लोगों से पूछताछ की। सहारा इंडिया की जमीन पर बने भवन में रहने वाले चौकीदार से पूछताछ की। जिससे पता चला कि घटनास्थल के पास ही करीब 15 दिन पहले कुछ लोग एक जमीन का सौदा करने आए थे। उसने आशंका जताई कि उन लोगों में अधिवक्ता भी शामिल थे लेकिन परिवार की ओर से इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई है। बेटे ने भी किसी भी व्यक्ति से रंजिश या विवाद होने से साफ इन्कार कर दिया है।
कांवड़ यात्रा को लेकर रविवार की शाम शहर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त होने के बावजूद अधिवक्ता शौकीन अली की हत्या कर दी गई। जमीन के विवाद में हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो वह अकेली ही जाते दिखाई दिए। जिससे माना जा रहा है कि उन्हें किसी ने कॉल घर से बुलाया था। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल से भी इसकी पुष्टि हो चुकी है।
जिसके जरिए पुलिस कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी कर रही है। पुलिस की चार टीमें अलग अलग एंगल पर जांच पड़ताल में जुटी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि अधिवक्ता शौकीन अली सिविल मामलों से जुड़े केसों की कोर्ट में पैरवी करते थे। बताया जा रहा है कि वह वकालत के अलावा प्रॉपर्टी का काम करने लगे थे। पुलिस यह भी देख रही है कि किसी मुकदमे की पैरवी की रंजिश में इस हत्याकांड को अंजाम तो नहीं दिया गया है।
इसके अलावा पुलिस यह भी देखा जा रहा है कि किसी प्रॉपर्टी को लेकर अधिवक्ता से कोई दुश्मनी तो नहीं मानने लगा था। अधिवक्ता चतरपुर गांव निवासी थे। करीब 20 साल से वह यहीं रह रहे थे। पुलिस की एक टीम यह भी जांच कर रही कि पैतृक गांव में तो उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं चल रही है।
पुलिस ने अधिवक्ता के मोबाइल के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई है। जिसमें कई संदिग्ध नंबर पुलिस के हाथ लगे हैं। जिसके जरिए पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। इसके अलावा शहर ने स्मार्ट सिटी के कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। कुछ फुटेज में वह अकेली जाते दिख रहे हैं। पुलिस ने घटनास्थल के आस पास भी लोगों से पूछताछ की।
यहां सहारा इंडिया की जमीन की चौकीदारी करने वाले व्यक्ति से भी पुलिस ने पूछताछ की। जिससे पता चला कि घटनास्थल के पास ही करीब 15 दिन पहले कुछ लोग एक जमीन का सौदा करने आए थे। उसने आशंका जताई कि उन लोगों में अधिवक्ता भी शामिल थे लेकिन परिवार की ओर से इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई है। बेटे ने भी किसी भी व्यक्ति से रंजिश या विवाद होने से साफ इन्कार कर दिया है।
घटना स्थल और गागन नदी किनारे की गई स्कूटी की तलाश हत्यारों ने अधिवक्ता की पहचान मिटाने के उद्देश्य से उनका शव कुएं में डाल दिया था। इसके अलावा शव के ऊपर से झाड़ियां डाल दी थीं। घटनास्थल और गागन नदी किनारे स्कूटी की तलाश की लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिल पाई है।
वकीलों ने एसपी सिटी से की हत्याकांड के खुलासे की मांग
अधिवक्ता शौकीन अली की हत्या की जानकारी मिलने पर साथी अधिवक्ता घटनास्थल पहुंच गए। उन्होंने अधिवक्ता के बेटे सुहेल से पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने एसपी सिटी और सीओ से वार्ता कर हत्याकांड का जल्द खुलासा करने की मांग की। मंगलवार को अधिवक्ता हत्याकांड के विरोध में हड़ताल पर रहेंगे।
दि बार एसोसिएशन लाइब्रेरी के अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा, महा सचिव अभिषेक भटनागर, संजीव कुमार राघव, त्रिलोक चंद्र दिवाकर, बृजलाल समेत अन्य अधिवक्ता घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके बाद लाकड़ी फाजलपुर पुलिस चौकी में बड़ी संख्या में अधिवकता जुट गए और उन्होंने एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह और सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर ने वार्ता की।
उन्होंने हत्याकांड का जल्द खुलासा करने की मांग की। महासचिव अभिषेक भटनागर ने बताया कि शौकिन अली दि बार एशोसिएशन एंड लाइब्रेरी के सदस्य थे। अधिवक्ता की मृत्यु से सभी साथी स्तब्ध हैं। मंगलवार को उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभा की जाएगी साथ ही न्यायिक कार्य पूर्ण रूप से स्थगित रहेगा।
शहर में बसने के बाद भी नहीं तोड़ा गांव से नाता
अधिवक्ता शौकीन अली की मौत से उनके पैतृक गांव चतरपुर के लोग भी गम में डूब गए। अधिवक्ता 20 साल पहले शहर में बस गए थे लेकिन उन्होंने गांव से नाता नहीं तोड़ा था। गांव किसी के घर में खुशी का माहौल हो या फिर कोई गम वह हर किसी के साथ खड़े नजर आते थे। उनकी मौत की सूचना मिलने पर गांव से बड़ी संख्या में लोग शहर पहुंच गए और उनके जनाजे में शामिल हुए।
अधिवक्ता शौकीन अली के भतीजे खुर्शीद अली ने बताया कि वह लगभग 20 साल पहले शहर में बस गए थे। शहर की जिगर कॉलोनी में मकान बनाने के बावजूद भी वह अपने गांव से जुड़े रहे। शादी विवाह का निमंत्रण हो या गम की सूचना वह गांव पहुंचते थे और लोगों की खुशियों व दुखों में शामिल होते थे। कुछ दिन पहले चतरपुर गांव निवासी निवासी सुलेमान की पुत्री अंजुम की मौत हो गई थी। जिसके दफन में शामिल होने के लिए वह गांव में पहुंचे थे।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में उनकी लगभग 30-35 बीघा खेती की जमीन है। जिसके सिलसिले में भी वह अक्सर गांव आते जाते रहते थे। व्यस्त जीवन के वजूद भी वह गांव के लोगों से लगातार संपर्क में रहते थे। अधिवक्ता शौकीन अली के दो भाई, सुभान अली व मुख्तियार अली गांव में ही रहते हैं, दोनों भाई खेती करते हैं।
शौकीन अली की मौत से गांव चतरपुर नायक सहित आसपास के अन्य गांवों में भी गम का माहौल है। उनके परिचित व मिलने वाले काफी तादाद में उनके घर पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
पुलिस की मौजूदगी में शव सुपुर्दे खाक किया
पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को अधिवक्ता का शव उनके घर जिगर कॉलोनी लाया गया। यहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता और उनके परिचित और रिश्तेदार जुटे। पुलिस की मौजूदगी में देर रात कब्रिस्तान में उनके शव को सुपुर्दे खाक कर दिया गया।