मुरादाबाद। अरबों रुपये के भूमि घोटालों के आरोपों से घिरी मायानगर सहकारी आवास समिति के भंग होने के आसार हैं। अपर आयुक्त आवास एवं अपर निबंधक विनय कुमार मिश्रा ने समिति का काला चिट्ठा लखनऊ मंगाया है। स्थानीय अधिकारियों की आख्या मिलने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही प्रबंध कमेटी भंग करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मूल आवंटियों का कहना है कि मामले की जांच ईडी से कराने के लिए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जाएगा।
मायानगर सहकारी आवास समिति के 184 मूल आवंटी अब भी अपना भूखंड और फ्लैट पाने के लिए भटक रहे हैं। भुक्तभोगी राजीव अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने करीब वर्ष 1985 में समिति के दो भूखंड खरीदे थे। दोनों की रजिस्ट्री कराई लेकिन उनको अधिकारपत्र नहीं मिला। भूखंड लेने के लिए वह स्थानीय अदालत के अलावा हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
समिति प्रबंधन प्रबंधन चाहता था कि वह पैसा लेकर भूखंड छोड़ दें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वह हार नहीं मानेंगे। समिति के घोटालों की जांच ईडी से कराने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजेंगे। इसी तरह एसके शर्मा और सावित्री शर्मा ने वर्ष 1988 में अलग-अलग आवंटनपत्र प्राप्त किया था लेकिन आज तक कब्जा नहीं मिल सका। बिजनौर के चिरंजी सिंह सहित 184 लोग अपने हक के लिए भटक रहे हैं। मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद अपर आयुक्त आवास एवं अपर निबंधक ने मायानगर सहकारी आवास समिति के घोटालों से जुड़े कागजातों को लखनऊ मंगाया है। उन्होंने मंडलीय सहकारी अधिकारी आवास सतीश कुमार से एक सप्ताह में स्थलीय निरीक्षण की आख्या मांगी है। आख्या मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। शासन स्तर से सख्ती के बाद कई प्रापर्टी डीलरों की सांसें फूल रही हैं। जांच में कई प्रापर्टी डीलरों की गर्दन फंस सकती है।