कोरोना संक्रमण काल में दुकान और प्रतिष्ठान बंद होने की वजह से पहले ही कारोबार की कमर टूटी हुई थी। अब ऑक्सीजन की कमी ने कारोबारियों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। एक माह बाद नवरात्र का त्योहार आ रहा है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से मूर्तियां बनाने का कारोबार लगभग ठप हो गया है क्योंकि वेल्डिंग में इसी गैस का प्रयोग होता है। व्यापारियों ने सरकार ने कारोबार के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग की है।
मुरादाबाद में अमरोहा गेट, बर्तन बाजार और मंडी चौक में मूर्तियां बनाने का कारोबार होता है। नवरात्र के त्योहार से लेकर दीपावली तक सिर्फ मूर्तियों का कारोबार करीब 50 करोड़ हो जाता है। त्योहार के डेढ़ महीने पहले से मूर्तियां बनना शुरू हो जाती थीं, लेकिन इस बार पहले कोरोना संक्रमण के कारण बाजार बंद होना और अब ऑक्सीजन की कमी से कार्य शुरू नहीं हो पाया है। चूंकि किसी भी धातु पर वेल्डिंग में ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है और इन दिनों कोरोना के कारण ऑक्सीजन की अस्पतालों में कई गुना खपत बढ़ गई है। ऐसे में बाजार में आक्सीजन का टोटा है। है भी तो कई गुना दामों पर मिल रही है। व्यापारियों का कहना है कि पूरे शहर में चल रहे इस कारोबार के लिए प्रतिदिन करीब सौ सिलिंडर प्रतिदिन की खपत है। हालत यह है कि इस समय तीन सौ से चार सौ रुपये के बीच मिलने वाला ऑक्सीजन का सिलिंडर 15 सौ रुपये तक का हो गया है। लोग यह पैसा भी देने को तैयार हैं पर फिर भी सिलिंडर मिलने में समस्या आ रही है। नवरात्र से लेकर दशहरा और आगे दीवाली तक का बाजार तैयार होता है। खास तौर पर लक्ष्मी, गणेश, रामदरबार बनाए जाते हैं पर इस बार भारी परेशानी हो रही है।
वर्जन...
सिलिंडर के चार गुना कीमतों के बावजूद मिल नहीं पा रहा। इसके कारण पिछले 15 दिन से उत्पादन बंद हो गया है। बाहर के व्यापारियों ने पूछताछ करना शुरू कर दिया है। उत्पादन नहीं होने की वजह से काम की हाय-तौबा मची है। अलीगढ़ से कच्चा माल आता है। प्रतिदिन करीब एक टन मूर्तियां बनती हैं। एक सिलिंडर सौ किलो की मूर्तियां के काम आता है।
अंकुर गोयल, मूर्ति कारोबारी।
उत्पादन नहीं होने की वजह से कारोबार ठप पड़ा है। दिल्ली से एक व्यापारी को भगवान राम और राम दरबार की दस हजार मूर्तियां चाहिए थीं। भगवान राम की मूर्ति के लिए डाई बनेगी, उसका खर्चा बढ़ेगा। राम मंदिर स्थापना के बाद से राम दरबार की मांग बढ़ गई है। यदि सिलिंडर की बढ़ी हुई कीमत पर माल बनवाएंगे तो खर्चा बढ़ेगा और आने वाले दिनों में सिलिंडर सस्ता होता है तो तैयार माल को कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। इससे भी हमारा ही नुकसान है।
अतुल अग्रवाल, मूर्ति कारोबारी।
सरकार को कोटा निर्धारित करना चाहिए, ताकि उद्योग चलते रहें। लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद और मध्यप्रदेश के कुछ जनपदों में राम दरबार की मांग बहुत ज्यादा है। कारीगरों ने वेल्डिंग के टांके की कीमत में तीन से चार गुना बढ़ोतरी कर दी है। अब एक टांका 30 रुपये हो गया है, जो पहले दस रुपये में किया जाता है। तैयार माल पर तीस रुपये प्रति किलो दाम बढ़ जाएंगे। इससे मूर्तियों की कीमतों में उछाल आएगा। पहले आठ घंटे चलने वाला सिलिंडर अब चार घंटे चल रहा है। इससे कारोबारियों को बहुत नुकसान हो जाएगा।
विपुल अग्रवाल, मूर्ति कारोबारी।
वेल्डिंग के लिए सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। सभी मूर्तियों की मांग ज्यादा है। मंदिर बनने की वजह से राम दरबार की मांग ज्यादा है। बंगलूरू, मुंबई और दिल्ली मूर्तियां जाती हैं। ढलाई अलीगढ़ में होती है और फिनिशिंग मुरादाबाद में कराते हैं। अलीगढ़ में काम नहीं हो पा रहा, जिसकी वजह से माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। रॉ मैटेरियल बढ़ गया है।
मुकुल अग्रवाल, मूर्ति कारोबारी।