धर्म और जात के नाम पर सांप्रदायिक दंगे और हिंसा कराकर नफरत भड़काने वालों के लिए जहां मो. मजहर एक मिसाल हैं, वहीं आर्थिक तंगी के बीच परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाली उनकी पत्नी अमीर जहां भी दिल से अमीर निकलीं। अमीर जहां को पति पर नाज है। मुंहबोली बहन को किडनी के फैसले पर उन्होंने खुशी जताई है।
मुरादाबाद के करूला इस्लाम नगर की तंग गली में परिवार के साथ किराये के मकान में रहने वाले ढिलाई कारीगर मो. मजहर पुत्र मो. सगीर मूलरूप से अमरोहा के कटरा गुलाम अली निवासी है। परिवार में पत्नी अमीर जहां और तीन बच्चे हैं। आठ साल पहले तक मो. मजहर अमरोहा में रहता था।
तब वह पड़ोसी ह्रदेश अग्रवाल के यहां सेल्समैनी करता था। इसी दौरान व्यापारी की बेटी अक्षी अग्रवाल को मो. मजहर ने अपनी मुंह बोली बहन बना लिया था। अक्षी उसे राखी बांधती थी। लेकिन कारोबार के सिलसिले में मो. मजहर मुरादाबाद आ गया और वह इस्लाम नगर में किराये के मकान में रहने लगा।
लेकिन मुंहबोली बहन अक्षी उसे हर रक्षा बंधन को राखी बांधती रही। कुछ दिन पहले मो. मजहर को पता चला कि अक्षी बीमार है। कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती है। उसके दोनों गुर्दे खराब हो चुके हैं। वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। अक्षी का कोई अपना भाई नहीं है।
मो. मजहर बहन की सेहत को लेकर तनाव में रहने लगा। उसने अपना गुर्दा देकर उसकी जिंदगी बचाने की ठान ली। लेकिन पत्नी और बच्चों के बारे में सोचता तो उसके कदम ठहर जाते। एक दिन वह घर में उदास बैठा था।
पत्नी के बार बार टोकने पर उसने बताया कि उसकी मुंहबोली बहन जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। उसकी सांसे बचाने के लिए किडनी देनी होगी। अमीर जहां भी दिल से अमीर निकली। उसने अपने पति के निर्णय को सही बताया।