मिलक क्षेत्र के खाता नगरिया गांव निवासी मोहसिन, समी उल्लाह, कामरान, सनी, मुजीब, मुकीम, उवैज, शारून, जुनैद, सलीम और मोहसिन दिल्ली के करोल बाग स्थित बापा नगर में जूते व चप्पल बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। बुधवार की सुबह अचानक जर्जर बिल्डिंग ढह गई। जिसमें 30 वर्षीय मोहसिन, दो सगे भाई 25 वर्षीय मुजीब, 27 वर्षीय मुकीम तथा 12 वर्षीय अमन की मौत हो गई थी।
अन्य 14 घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार शाम छह बजे अमन और मुकीम का शव जैसे ही गांव पहुंचे तो दोनों घरों में चीख-पुकार मच गई। पूरा गांव गमगीन हो गया। शवों को देखने के लिए गांव की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ गया। अमन और मुकीम के शवों के पहुंचने के दो घंटे बाद मोहसिन और मुजीब के शव पहुंचे। चारों शवों का एक साथ नम आंखों से दफन कर दिया गया।
तीन माह बाद होनी थी मुजीब की शादी
दोनों भाइयों की मौत से परिजनों में बेहद गम का माहौल है। रो-रोकर परिजन एक ही बात बोल रहे हैं कि उनका तो सबकुछ खत्म हो गया। परिजनों ने बताया कि मुजीब की शादी तय हो गई थी, तीन माह बाद उसकी शादी होनी थी। अचानक हुई हृदय विदारक घटना से परिजन बेहाल हैं। मुजीब और मुकीम की एक 23 वर्षीय बहन है, जो अपने दोनों भाइयों पर ही निर्भर थी। वहीं मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, मुजीब और मुकीम का एक 17 वर्षीय छोटा भाई है। मुजीब और मुकीम के कंधों पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। दोनों भाइयों की मौत से परिवार के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पिता बीमार रहते हैं।
15 दिन पहले तय हुई थी मोहसिन की शादी
हादसे में मृतक मोहसिन का 15 दिन पहले रिश्ता तय हो चुका था, परिजनों में बहुत खुशी थी कि मोहसिन का जल्द निकाह होगा। कुछ ही समय में उसकी शादी होनी थी, लेकिन परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया। मोहसिन के पिता की 12 साल पहले मृत्यु हो गई थी और मोहसिन 10 साल से दिल्ली में रहकर जूते-चप्पल की फैक्ट्री में काम कर रहा था। वहीं मोहसिन की तीन बहनें हैं, जिनमें दो की शादी हो चुकी है और एक बहन की शादी होना बाकी है।
घूमने गया था अमन, घर आया जनाजा
दिल्ली में काम कर रहे उवैस का भांजा 12 वर्षीय अमन 15 दिन पहले ही घूमने के लिए गया था, लेकिन बिल्डिंग हादसे ने परिवार के चिराग को छीन लिया। जब अमन का जनाजा घर आया तो मां बेसुध हो गई, कुछ बोल नहीं पा रही थीं। अमन कि मां ने बड़े ही संघर्ष से अपने बच्चों को अपने पति के इंतकाल के बाद पाला-पोसा था। वह घर पर ही काम कर घर का खर्च चलाती हैं। अमन की एक बहन है।
मानसून से पहले सर्वे में सही पाई गई थी इमारत
करोल बाग इलाके में बुधवार को जमींदोज हुई इमारत को मानसून से पहले एमसीडी के सर्वे में सही पाया गया था। इसे रहने के लिहाज से खतरनाक घोषित करने की जगह पुरानी इमारत बताकर छोड़ दिया गया था। जबकि इमारत गिरने के बाद स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पहले से ही इमारत की हालत खस्ता थी।
एमसीडी प्रतिवर्ष मानसून से पहले पुरानी इमारतों की स्थिति के बारे में सर्वेक्षण करती है। उसने इस वर्ष भी पुरानी इमारतों का सर्वे किया गया था। इस दौरान एमसीडी ने इस इमारत को सुरक्षित घोषित किया था। इस तरह यहां रहने व कार्य करने वाले लोगों को यह भरोसा था कि वे सुरक्षित हैं। मगर यह इमारत इस साल बारिश नहीं झेल पाई और बुधवार को गिर गई। इस तरह एमसीडी के सर्वे के साथ-साथ उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना शुरू हो गया है।
इमारत खतरनाक घोषित होने पर कराई जाती खाली
एमसीडी के सर्वेक्षण में इमारत खतरनाक या फिर जर्जर हालत में मिलने पर उसे खाली कराने व मरम्मत करने का आदेश देेने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, इमारत अत्यधिक जर्जर होने पर उसे गिराया भी जा सकता है। एमसीडी की ओर से खतरनाक इमारतों को खाली करानेे के आदेश देती रही है और उनकी मरम्मत कराने का भी नोटिस देती आई है।
इलाके में चल रहीं हजारों फैक्ट्रियां
विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही राजधानी में हर साल सैकड़ों जान जा रही हैं। कभी अवैध फैक्टरी में आग लगने बेगुनाहों की जान जाती है तो कभी इमारत ढह जाने से। बुधवार को बापा नगर इलाके में गिरी इमारत ऐसी जगह पर थी जहां पर राहत बचाव कार्य करना बेहद कठिन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में अवैध तरीके से हजारों फैक्ट्रियां संचालित हैं। उनकी इमारत भी जर्जर स्थिति में है।
इमारत का मालिक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर
करोल बाग के बापा नगर स्थित चार मंजिला इमारत गिरने के मामले में इमारत का मालिक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। प्रसाद नगर थाना पुलिस ने इमारत के मुख्य मालिक अनिल उर्फ बोबी सहित दो लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या व मरम्मत करने में लापरवाही बरतने समेत दूसरी धाराओं में मामला दर्ज किया है। उधर, बृहस्पतिवार हादसे में जान गंवाने वाले अमन (12 वर्ष), मुकीम (25 वर्ष), मुजीब (18 वर्ष), मोसिन (26 वर्ष) के शव पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिए गए।
इमारत के मालिक ने नहीं करने दी मरम्मत
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इमारत जर्जर थी। इसकी मरम्मत के लिए मोसिन ने कई बार मिस्त्री बुलाया था। मोसिन के भाई आसिम रजा का कहना था कि एक बार भाई ने काम शुरू भी करवा दिया था, लेकिन मालिक अनिल ने काम रुकवा दिया। उसका कहना था कि वह पूरी इमारत को पूरा तोड़कर नए सिरे बनवाएगा।
घटनास्थल से हटाया मलबा
बापा नगर स्थित सात जेसीबी लगाकर मलबे को देर रात तक साफ कर लिया गया। वहीं, मलबे में दबे मजदूरों का वीडियो बृहस्पतिवार सुबह से सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दर्द में चिल्लाते हुए पत्थरों के बीच में फंसे लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक वीडियो में मलबे में दबे शख्स को सुना जा सकता है कि मुझे और मेरे भाई को बचा लो।