भोजपुर इलाके में सट्टे का धंधा जोरों पर है। लिखापढ़ी कुछ नहीं, पर्चियों पर चल रहा है पूरा खेल। सट्टेबाज ने पर्ची ली और नंबर आने पर पैसा भी शांति से ले लिया। सुबह से शाम तक सटोरिए फुसफुसाते हैं - कटा तो पर्ची..गाजियाबाद, शालीमार या लोकल सट्टे की..।
न कोई विवाद न कोई झगड़ा, इसलिए पुलिस को भी नहीं करनी पड़ती मशक्कत। क्षेत्र के छह खाईबाड़ बिसात बिछाकर रोजाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। शाम चार बजे से तड़के तक सौ नंबरों पर सैकड़ों पर्चियां लगाई जाती हैं, लेकिन पुलिस इसकी जानकारी न होने की बात कह रही है। बताया जाता है कि एक खाईबाड़ थाना भोजपुर के सामने ही अपना धंधा चला रहा है।
क्षेत्र की महिलाएं इस धंधे से बहुत परेशान हैं। कई बार इसकी शिकायत को लेकर थाने में भी हंगामा हुआ है, लेकिन खाईबाड़ों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप यहां तक लग रहे हैं कि कार्रवाई न करने के लिए थाने को हर महीने लाखों रुपये पहुंचाए जाते हैं।
गाजियाबाद, शालीमार, गली और दिसाबर नाम के सट्टे का नंबर मुंबई से ऑनलाइन मिलता है, जबकि लोकल सट्टे का नंबर सभी खाईबाड़ मिलकर यहीं खोलते हैं। चर्चा है कि कुंदरकी और गलशहीद इलाके में भी सट्टे का धंधा खूब फलफूल रहा है।
सट्टे का धंधा बहुत पुराना है। एक चार्ट पर सौ नंबर छपे होते हैं, जिनमें से एक नंबर पर कोई भी सट्टा लगा सकता है। पांच रुपये से लेकर हजारों रुपये का सट्टा एक नंबर पर लगाया जाता है। इस तरह सौ नंबरों पर लाखों रुपये का सट्टा लग जाता है।
शाम चार बजे गाजियाबाद नाम का सट्टा लगता है, जो शाम साढ़े सात बजे खोला जाता है। साढ़े सात बजे से शालीमार नाम का सट्टा लगता है, जो रात नौ बजे खोला जाता है। नौ बजे गली नाम का सट्टा लगता है, जो रात ग्यारह बजे खुलता है।
ग्यारह बजे दिसाबर नाम का सट्टा लगता है, जो सुबह पांच बजे तक खुलता है। शाम को एक लोकल सट्टा भी लगाया जाता है, जो यहां के खाईबाड़ मिलकर खोलते हैं। इस संबंध में थाना भोजपुर प्रभारी प्रेमचंद्र शर्मा कहते हैं कि पहले यहां सट्टे का धंधा था, लेकिन अब नहीं है।
‘शहर में सट्टेबाजी रोकने के लिए सभी एसएचओ/एसओ को निर्देशित किया गया है। कई सटोरियों को जेल भेजा गया है। अन्य सटोरियों की तलाश की जा रही है। आईपीएल में सट्टेबाजी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।’ - मनोज तिवारी, एसएसपी