सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी, बिनती सुनहु सदाशिव मोरी
आशुतोष तुम अवढर दानी, आरति करहु दीन जन जानी
(राजा दशरथ ने भगवान शंकर को आग्रहपूर्वक याद करके कहा- कि दूसरों का सदैव कल्याण करने वाले प्रभु आप मेरी विनती सुनें, आप शीघ्र प्रसन्न होकर सर्वस्व दान करने वाले हैं, जान लीजिए कि मैं दीन जन के रूप में आपकी आरती कर रहा हूं )
मुरादाबाद। गंगा की चंद बूंदों के अभिषेक से रीझकर सर्वस्व दान करने वाले भोले भंडारी के जलाभिषेक को कोटि-कोटि भक्त तैयार हैं। हृदय में श्रद्धा का सागर हिलोरें ले रहा है। अखिल विश्व को बचाने के लिए हलाहल का पान करके नीलकंठ बनने की वजह से ही इनका नाम महादेव अर्थात देवों का देव है। भोले-भंडारी के भक्त भी शिवोहम, शिवोहम का भाव लेकर आस्था पथ पर झूम रहे हैं। भक्त मां सुरसरि के तटों से श्रमसीकर बहा कांवड़ में पवित्र जल लाए हैं। उन्हें तुम्हारे प्रतीक शिवलिंग पर जलार्पण के माध्यम से संतृप्त करके तृप्त होना है। पशुपतिनाथ की संज्ञा वाला यह आराध्य बड़ा ही अनूठा और निराला है। कुछ भी राजसी और दिव्य नहीं। श्मशान में वास, काया पर बाघंबर, गले में सर्पमाल, माथे पर अर्ध चंद्र, उलझी जटाओं में गंगा, नंदी वाहनवाला यह आराध्य अनूठा है। जिसके तांडव से त्रिलोकी डगमगाने लगती है। जिसके डमरू निनाद से माहेश्वर सूत्र समेत पूरा संस्कृत वांग्मय निर्झर होकर बह निकलता हो। यह कैसा निराला देव है जो भांग, बिल्वपत्र, धतूरा जैसे अखाद्य पदार्थों का भोग लगाकर प्रसन्न हो जाता है। हमारी कांवड़ का जल स्वीकार कर शिव हमारे ऊपर आशीष वर्षा करेंगे। भोले भक्तों का यह भोला विश्वास ही उन्हें भी भोले ही बना देता है।
श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर आज मंदिरों में भगवान शंकर का जलाभिषेक किया जाएगा। हरिद्वार और ब्रजघाट से गगरी में जल भरकर लाए कांवड़िया गंगाजल और पंच द्रव्यों से आज गंगाधर का अभिषेक करेंगे। सभी मंदिरों में व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। दिन भर प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटा रहा। वहीं रविवार को दिन भर कांवड़ियों के जत्थों के पहुंचने का क्रम जारी रहा। पूरा शहर भगवा रंग में रंगा दिखाई दिया। भोले के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया था।
मुरादाबाद में चौथे सोमवार को हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लाकर भोलेबाबा का जलाभिषेक करने का चलन है। इसके लिए शुक्रवार से शनिवार सुबह तक शहर की प्रत्येक कालोनी से कांवड़ियों का जत्था निकला था। परिवार की महिलाओं ने रोली-तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। शनिवार रात से ही उनका लौटना शुरू हो गया था। रविवार दोपहर बाद कांठ रोड़ पर कांवड़ियों की संख्या कुछ कम हो गई, लेकिन दिल्ली रोड़ पर लाइन लगी रही। डीजे पर बजते भजन उनके उत्साह को दोगुना कर रहे थे। दोपहर में भीषण गर्मी होने के बावजूद उनके कदमों में थकान नहीं थी। हर दस से 15 मीटर की दूरी पर एक भोले का बेड़ा था। प्रत्येक बेड़े में 50 से 60 सदस्यों का जत्था था। कंधे पर कांवड़, पैरों में घुंघरू और तन पर भगवा वस्त्र पहने भक्त भोले की भक्ति में झूमते हुए अपने गंतव्य को गए। कांवड़ियों के नंगे पैरों में कंकड़-पत्थर चुभ रहे हैं, लेकिन शिवशंकर की धुन में वह यह दर्द भी हंसते-हंसते सहकर आगे बढ़ रहे हैं।
सावन के चौथे सोमवार को भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सड़कों पर भगवा रंग का जन सैलाब उमड़ पड़ा। भोले बाबा के जयकारों से शहर गूंज रहा था। चारों तरफ भोले के भक्तों की टोलियां नजर आ रही थीं। दिल्ली रोड पर सुबह से रात भर पैर रखने तक के लिए जगह नहीं मिली। जिधर भी नजर जा रही थी, भोले के भक्तों का सैलाब दिखाई दे रहा था। कदम-कदम पर लगे शिविरों में प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों का हुजूम एकत्र हो गया। डीजे पर भोलेनाथ के भजन बजते रहे और झांकियां मन मोह रही थीं। शिव-पार्वती के स्वरूपों ने जमकर नृत्य किया। खड़ेश्वरी कांवड़ के साथ डाक कावड़ और बैकुंठी कांवड़ की धूम रही। भोले बाबा की बारात में युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का उत्साह भी देखने लायक था। श्रद्धालुओं के उल्लास की स्थिति यह थी कि राहगीरों को लोकोशेड पुल से गांगन पुल तक पहुंचने में ही दो से तीन घंटे का समय लग गया।
खुद खींची भगवान की झांकी
कावंड़ के अलावा श्रद्धालुओं ने वाहनों पर भी झांकियां सजाई थीं। ठेेले और बुग्गी पर रुई के माध्यम से आकर्षक शिवलिंग बनाए गए थे। इसको उन्होंने फूल, झालर, गुब्बारे आदि से सजाया था। भोले के भक्तों ने खुद ही नंदी बनकर झांकी को खींचा।
तिरंगा से देशभक्ति का संदेश
भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में देशभक्ति का संदेश भी दे रहे हैं। उनकी कांवड़ से लेकर ट्रैक्टर, बाइक, साइकिल और ट्रक पर सजे बेडे़ में तिरंगा लगाकर चल रहे हैं। छोटे से बड़े तिरंगा की वजह से माहौल देशभक्ति का बन रहा है।
मन मोह रहीं झांकियां
पाकबड़ा से लेकर रामपुर रोड़ तक शिविरों की धूम रही। यहां पर भोले के भक्तों के लिए नाश्ता, भोजन की पूरी व्यवस्था थी। बीमार होने पर भोले के भक्तों के लिए उपचार का प्रबंध किया गया था। इसके अलावा शिव परिवार और मातारानी की झांकियां मन मोह रही थीं। भजनों पर भोलेनाथ, माता पार्वती, मां काली, राधा-कृष्ण के स्वरूप नृत्य कर रहे थीं। बेड़े में बच्चे भी भगवान के स्वरूप में मन मोह रहे थे।
जीरो प्वाइंट पर किया स्वागत
ब्रजघाट से गंगाजल लेकर झूमते और थिरकते हुए कांवड़िये जीरो प्वाइंट पाकबड़ा पर पहुंचे। यहां पर उनके स्वागत के लिए घर की महिलाएं मौजूद थीं। इसके बाद उन्होंने कांवड़ को खुद उठा लिया और बेड़े के साथ भोले के भजनों पर थिरकते हुए मंदिर तक पहुंचीं।
सेल्फी का रहा क्रेज
झांकियों को देखने के लिए क्षेत्रवासियों का सुबह से ही आगमन शुरू हो गया था। शिविर संचालकों ने भी डीजे के अलावा आर्केस्टा की व्यवस्था की थी। फिल्मी गानों की धुन पर बज रहे भजनों से वातावरण भक्तिमय हो रहा था। इसके बाद भगवान के स्वरूपों के नृत्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं के कदम ठहर गए। वाहनों को रोककर उन्होंने सेल्फी और वीडियो बनाई।
ठहर गया चौधरी चरण सिंह चौक
सबसे ज्यादा भीड़ चौधरी चरण सिंह चौक पर थी। यहां पर सड़क के दोनों तरफ शिविर लगे हुए थे। एक तरफ नगर निगम का शिविर था तो दूसरी तरफ पुलिस चौकी लाइनपार के पास महादेव सेवा समिति की ओर से लगे 18वें भंडारे में बर्फ की सिल्ली से बना 12 फीट ऊंचा हिमलिंग आकर्षण का मुख्य केंद्र था। बाबा बर्फानी गुफा, टीवी कलाकार राहुल कुमार द्वारा मनमोहक झांकियां व अन्य कलाकारों द्वारा शिव भजनों का गुणगान किया। भक्तों के दर्शन के लिए बेरीकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। इसके पास ही बारी-बारी से भगवान के स्वरूप नृत्य कर रहे थे। पुलिस प्रशासन की व्यवस्था के बावजूद यहां पर यातायात ठहर गया था।