मुरादाबाद। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। सदस्यों ने कार्यालय और आवास पर दस सालों में खर्च का ब्यौरा मांगा तो अफसर एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। अफसरों की चुप्पी से सदस्यों ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया। बसपा सदस्य बैठक का बहिष्कार कर चले गए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने खर्च की जांच के लिए कमेटी बनाने की घोषणा की, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।
सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में अनुमानित बजट पर चर्चा के बाद अपर मुख्याधिकारी एसपी शर्मा ने चालीस करोड़ 36 रुपये के बजट का प्रस्ताव रखा गया। सदन ने 40 करोड़ के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 में 46.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वित्तीय वर्ष 2019-20 में पुनरीक्षित आय-व्यय 75.38 करोड़ रुपये रहीं।
पंचायत सदस्यों ने अपने अपने मुद्दे उठाए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने समस्याएं सुनने के बाद उनका समाधान करने का आश्वासन दिया। सांसद वीर सिंह के प्रतिनिधि चंद्रपाल सिंह ने पंचायत के दफ्तर और आवासीय कालोनी पर दस साल में हुए खर्च का ब्योरा मांगा। सपा विधायकों ने समर्थन करते हुए जांच की मांग की। खर्च का ब्यौरा मांगते ही ठंड के माहौल में मामला गरमाया गया। पंचायत विभाग के अफसरों की खामोशी पर सदस्यों ने आरोप लगाए। बसपा समर्थित सदस्यों ने बहिष्कार कर चले गए। सदस्यों के हंगामे के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश कुमारी ने खर्च की जांच के लिए कमेटी बनाने पर सहमति दे दी। सांसद एसटी हसन ने भी कई प्रस्ताव रखे। बैठक में जिला पंचायत में हाजिरी के लिए बायोमैट्रिक मशीन लगाने, सदस्यों के क्षेत्र में पांच-पांच आईएसआई हैंडपंप लगाने, कचहरी में उप निबंधन कार्यालय के लिए जगह देने, स्कूलों में स्वेटर, मोजे वितरण में पंचायत सदस्य की मौजूदगी का प्रस्ताव प्रस्ताव हुआ।