jamastmi celebration two days in moradabad
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मुरादाबाद। कोरोना काल में इस बार भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाएगी। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। 11 अगस्त को सुबह नौ बजकर सात मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह तीन बजकर 27 मिनट से पांच बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
इस्कॉन प्रचारक आचार्य धीर शांतदास ने बताया कि स्मार्त और वैष्णवों के भिन्न मत होने के कारण तिथियां अलग-अलग बताई जा रही हैं। स्मार्त भक्तों का मानना है कि जिस दिन तिथि है उसी दिन जन्माष्टमी मनानी चाहिए। स्मार्तों के मुताबिक अष्टमी 11 अगस्त को है। जबकि वैष्णव भक्तों का कहना है कि जिस तिथि से सूर्योदय होता है पूरा दिन वही तिथि होती है। इस अनुसार अष्टमी तिथि में सूर्योदय 12 अगस्त को होगा। मथुरा, वृंदावन बिहारी मंदिर और द्वारका में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। जबकि उज्जैन, जगन्नाथ पुरी और काशी में 11 अगस्त को उत्सव मनाया जाएगा।
प्राचीन शिव मंदिर झंझारपुर के महंत पंडित केदारनाथ मिश्र ने बताया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कोरोना वारयस के कारण कान्हा के भक्त सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी मंदिर में कम और घरों में ज्यादा मनेगी। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए लोग अपनी कॉलोनी, मोहल्ले, गांव के श्रीकृष्ण मंदिर में पूजा अर्चना करें। यदि मंदिर खुलने की अनुमति न हो तो अपने घरों में परंपरा अनुसार झूला लगाकर पूजा अर्चना कर सकते हैं। यथा संभव पीतांबर परिधान धारण करें। रात में कन्हा को पंजीरी का भोग लगाएं। गृहस्थ लोगों के लिए जन्माष्टमी पर्व 11 अगस्त को रहेगा। वहीं, साधु और सन्यासियों के लिए 12 अगस्त को मनाएंगे। कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे। 11 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय के बाद लगेगी, लेकिन पूरे दिन और रात में रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।