कुंदरकी में निकले जुलूस ए अमारी में शामिल अजादार संवाद
कुंदरकी। नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की शहादत के गम में जुलूस-ए-अमारी (चुप ताजिया) निकाला गया। अजादारों ने नम आंखों से कहा अजा ए हुसैन अलविदा अलविदा।
मोहर्रम का चांद दिखाई देने के बाद नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला का गम में मजलिसों, मातम व जुलूस शुरु हो गए जो यह सिलसिला सवा दो महीने चला। सोमवार को हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की शहादत के गम का आखरी जुलूस की मजलिस इमामबाड़ा हजरत अबुतालिब में हुई जिसमें कमर अब्बास काजमी ने मरसिया पढ़ा और कम्बर रजा रिजवी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को यजीदी फौज ने कत्ल करके उनके परिवार के लोगों को कैदी बना लिया और उन पर जुल्म करता रहा। एक साल बाद जब यजीद ने हजरत इमाम हुसैन के परिवार को रिहा किया तो हजरत इमाम हुसैन की बहन जनाबे जैनब ने यजीद के घर में ही हजरत इमाम हुसैन के शहादत के गम में मजलिस की बुनियाद रखी। हजरत इमाम हुसैन के बेटे जनाबे इमाम सय्यद ए सज्जाद और उनके परिवार आठ रब्बीउल अव्वल को कर्बला से मदीने पहुंचे। नम आंखोे के बीच जुलूस ए अमारी बरामद हुआ। जुलूस में शबीहे ताबूत, काले अलम मुबारक, ऊंटोें पर सजी काली अमारियां, शबीहे जुलजिनाह (घोड़ा) शामिल रहे। जुलूस के दौरान शिया समुदाय के युवाओं ने मरसिये पढ़े। वहीं मौलाना आफाक आलम जैदी, काशिफ अब्बास काजमी, एजाज हाशिम नकवी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर रोशनी डाली। अंजुमन अकबरी, अंजुमन शाने हैदरी, अंजुमन अलमुर्तजा, अंजुमन हैदरी नौगांवा सादात, अर्श नकवी मेरठ, अंजुमन अश्के अजा भीकनपुर ने नोहाख्वानी की। जुलूस रफीक हुसैन के अजाखाने में पहुंच कर समाप्त हुआ। देर् शाम अंजुमन अकबरी की जानिब से अलविदाई मजलिस हुई और महिलाओं के अजाखाने में मजलिसें हुईं। वहीं सवा दो महीने बाद शिया समुदाय में खुशियों के कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाएगें।