मुरादाबाद। बीस हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में मुरादाबाद की जिला जेल में बंद बिजनौर के डीपीआरओ रिजवान अहमद ने पंचायत राज एक्ट, कानून और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने इसके लिए अपने अधिवक्ता के जरिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। कोर्ट ने जेल प्रशासन से भी इस संबंध में आख्या मांगी है।
बिजनौर के प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी रिजवान अहमद को आठ अप्रैल 2026 को बरेली विजिलेंस की टीम ने 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बिजनौर में पंचायत सचिव शुभम मलिक की शिकायत पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की थी। सचिव ने आरोप लगाया था कि उनके क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं की शिकायत की प्रभारी डीपीआरओ (जिला पंचायत राज अधिकारी) रिजवान अहमद जांच कर रहे थे। जांच के निस्तारण करने के लिए उनसे 25 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में 20 हजार रुपये में सौदा तय हो गया था। टीम ने कोर्ट में पेश किया था जहां से उन्हें मुरादाबाद जेल भेज दिया गया था। इसके बाद से वह मुरादाबाद जेल में ही बंद हैं। उन्होंने पंचायत राज एक्ट, नए कानून और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन जेल प्रशासन ने जेल मैनुअल का हवाला देते हुए बाहर से किताबें देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद डीपीआरओ ने अपने अधिवक्ता के जरिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि कोर्ट में डीपीआरओ के संबंध में आख्या मांगी थी। आख्या रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई है।