मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण के बढ़ते दौर में मरीजों को भर्ती करने के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए आइसोलेशन कोच अब सामान्य बोगियों में बदले जा सकते हैं। इन कोचों की स्थिति को परिवर्तित करने के लिए रेलवे बोर्ड के आदेशों का इंतजार किया जा रहा है। इसी सप्ताह बोर्ड की ओर से पत्र जारी हो सकता है। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि यह कोच सामान्य बोगियों में तब्दील होंगे या रेलवे इनका वैकल्पिक प्रयोग करेगा।
अप्रैल-मई माह में संक्रमण तेजी से बढ़ता देख रेलवे ने पूरे देश में सामान्य बोगियों को आइसोलेशन कोच में बदला था। मुरादाबाद रेल मंडल में भी तकरीबन 70 आइसोलेशन कोच बनाए गए थे। इनमें से 22 कोच मुरादाबाद में खड़े किए गए थे। रेलवे ने प्रत्येक बोगी पर दो लाख रुपये खर्च कर आइसोलेशन कोच में बदला था। इन कोचों में आक्सीजन सिलेंडर, ग्लूकोस से लेकर अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपकरण भी उपलब्ध कराए गए थे। 10 माह में एक भी मरीज को इन कोचों में भर्ती नहीं करना पड़ा। अब चूंकि संक्रमण कम है और रेलवे अस्पताल को भी एल-2 श्रेणी के कोविड अस्पताल से पृथक कर दिया गया है। इसलिए आइसोलेशन कोचों को भी सामान्य बोगियों में बदला जा सकता है। रेलवे के कैरिज एंड वैगन विभाग के सीनियर डीएमई समर्थ सिंह ने बताया कि इन कोचों के संबंध में एक दो दिन में रेलवे बोर्ड से पत्र प्राप्त हो सकता है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी, फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं दूसरी ओर रेलवे परामर्श दात्री समिति का कहना है कि आइसोलेशन कोचों के विषय में समिति रेलवे प्रशासन को सुझाव देगी। समिति के सदस्य मोहम्मद अजीम का कहना है कि प्रत्येक स्टेशन पर एक या दो कोच आपात स्थिति के लिए रखे जाने चाहिए। यदि आउटर पर कोई दुर्घटना हो तो इन कोचों को मौके पर भेजकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है।