फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: जीआईसी के कंक्रीट मैदान से निकले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। जिस मैदान की मिट्टी ने कभी मुरादाबाद को हॉकी का गढ़ बनाया था आज वही मैदान अपनी बदहाली पर खामोश खड़ा है। देश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का खिलाड़ी देने वाला यह जीआईसी मैदान अब भी शहर में हॉकी की नर्सरी कहलाती है जहां तीन से चार वर्ष के बच्चे भी हॉकी की स्टिक थामे हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। यह मैदान गड्ढे, कंक्रीट बदइंतजामी के बोझ तले दबा हुआ है। जबकि इसी मैदान से निकलकर शहर के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की टीम में अपनी जगह बनाई है। जीआईसी मैदान की सबसे बड़ी पहचान यही रही है कि यहां घास नहीं बल्कि कंक्रीट भरी सतह पर खिलाड़ियों ने अभ्यास कर भारत की जर्सी तक का सफर तय किया है। यह वही मैदान है जहां कोच फसाहत खां जैसे गुरु नौजवान खिलाड़ियों को तैयार करते थे। बंटवारे के बाद फसाहत पाकिस्तान चले गए और पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के कोच भी बने। हालांकि उन्होंने भारत के खिलाफ खेलने से इंकार कर दिया था। यह मैदान सिर्फ खेल नहीं बल्कि हॉकी के कई कहानियों को समेटे हुए है।
विज्ञापन

पिछले दस वर्षों में क्लब से खिलाड़ियों की संख्या लगातर घटती जा रही है। पहले जहां सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करते थे वहीं अब खिलाड़ियों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। मौजूदा समय में मो. फराज खान जैसे खिलाड़ी शहर का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कोच इकबाल खान का कहना है कि कंक्रीट पर खेलने वाला खिलाड़ी जब टर्फ पर उतरता है तो उसकी गति और नियंत्रण अपने आप अलग दिखती है।
00


- खेलो इंडिया का भी चल रहा है सेंटर
सोनकपुर स्टेडियम में खेलो इंडिया का हॉकी सेंटर भी चल रहा है। सेंटर होने के बावजूद स्टेडियम में हॉकी के खिलाड़ियों को अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्टेडियम में खिलाड़ियों को न तो घास मिल रही है और न ही मानकों के अनुरूप खेलने के लिए स्थान। जीआईसी मैदान पर जगह तो है लेकिन गड्ढों से मैदान पटा हुआ है। हालांकि जीआईसी मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में तब्दील किया जा रहा है लेकिन खिलाड़ियों का एस्ट्रोटर्फ का सपना कब तक पूरा होगा इसका अंदाजा अभी किसी को भी नहीं है। हॉकी की दुर्दशा को देखते हुए खिलाड़ी दूसरे शहर, छात्रावासों और रेलवे मैदानों में जाकर अभ्यास करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

00
- जीआईसी से हॉकी सीखकर बनाया कॅरिअर
जीआईसी मैदान से निकलकर कई खिलाड़ियों ने खेल कोटे से नौकरी भी पाई है। इनमें मो. अली खान ने एयरफोर्स, सैयद अमान अली, मो. इमरान खान व नागेंद्र सिंह ने शिक्षा विभाग, मो. इशान ने एयर इंडिया, मो. फराज ने इंडियन ऑडिट, इकबाल खान व हुसैन अली खान ने रेलवे, ललित ने खेल विभाग और नवीन व शेर खान ने एसएसबी में नौकरी हासिल की है।

00
जीआईसी के कंक्रीट भरे मैदान की दीवारों के सहारे मैंने ड्रैग फ्लिक मारना सीखा। आज यही मेरी ताकत है। नीली जर्सी पहनने के बाद भी जब मैदान में उतरा तो जीआईसी का मैदान आंखों में रहा। यहां टर्फ बनेगा और प्रतिभाएं निखरेंगी तो हॉकी को संजीवनी मिलेगी।
- मो. फराज खां, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
00

शहर को हॉकी के लिए मिनी स्टेडियम की जरूरत है। हमारे जिले से क्रिकेट के कई खिलाड़ी निकले हैं। हॉकी में भी यह सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। इसके लिए खिलाड़ियों को माहौल की जरूरत है और वह सुविधाओं के बिना नहीं मिल पाएगा।
विज्ञापन

- सिमरन सिंह, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें