मुरादाबाद। हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर एक के बाद एक संकट के बादल छा रहे हैं। सरकार ने इंसेंटिव सुविधा बंद कर दी है। निर्यातकों को लग रहा था कि शायद अब तक किए गए निर्यात पर तो इंसेंटिव मिलेगा और वे आवेदन कर सकेंगे पर एक झटके में सरकार ने वेबसाइट भी बंद कर दी। इसी पर आवेदन किए जाने थे। निर्यातकों का कहना है कि ऐसा होने से उन्हें भारी नुकसान होगा। हैंडीक्राफ्टस एक्सपोर्टस एसोसिएशन ने वाणिज्य, उद्योग मंत्री को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराते हुए आनलाइन आवेदन शुरू कराने का अनुरोध किया है।
निर्यातकों द्वारा निर्यात किए गए उत्पाद पर वस्तु निर्यात योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा इंसेंटिव दिया जाता है। ये इंसेंटिव उत्पाद के अनुसार तीन से सात प्रतिशत तक होता है। निर्यातकों द्वारा जितनी रकम का माल एक्सपोर्ट किया है। इसके लिए निर्यातक को निर्यात किए गए माल के बिल आदि प्रपत्र विदेश व्यापार महानिदेशालय की साइट पर आनलाइन डालनी होती है। जिसके बाद सिस्टम द्वारा खुद ही एक्सपोर्टर के उत्पाद के आधार पर इंसेंटिव तय कर पर्ची जारी कर देता है। ये इंसेंटिंव एक्सपोर्टर को मिल जाता है। हैंडीक्रॉफ्टस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के सचिव अवधेश अग्रवाल के मुताबिक राजस्व विभाग ने इस सत्र के लिए दिसंबर तक 9 हजार करोड़ रुपये की धनराशि इंसेंटिव के लिए तय की थी। ताजा जानकारी के अनुसार अभी तक देश में केवल 422.4 करोड़ रुपये की इंसेंटिव पर्ची जारी हुई है, लेकिन विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अभी से अपनी ऑन लाइन आवेदन की साइट बंद कर दी है। इस कारण एक्सपोर्टर अपने इंसेंटिव के लिए भी आवेदन नहीं कर पा रहे। इस समस्या को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़ी कई संस्थाओं के माध्यम से इस समस्या से पत्र उन्हें भेजा है। उनसे ऑन लाइन आवेदन को फिर से खोलने की मांग उठाई है। ये भी अनुरोध किया है कि वह इस योजना को 31 दिसंबर के बाद भी जारी रखें।
...इसलिए होगा मोटा नुकसान
निर्यातकों द्वारा अपने तैयार उत्पाद की कीमत तय करने में मिलने वाले इंसेंटिव को भी जोड़ता है। इसी आधार पर माल की कीमत तय की जाती है। इसे जोड़कर ही माल के ऑर्डर लिए गए थे। प्रतिस्पर्धा के दौर में बहुत से एक्सपोर्टर केवल इंसेंटिव की रकम को ही अपना लाभ मानकर व्यवसाय करते हैं।इसलिए इस योजना का लाभ न मिलने पर उन्हें लाखों का घाटा हो सकता है।
500 करोड़ के सालाना नुकसान का अनुमान
जिले से करीब सात से दस हजार करोड़ का माल एक्सपोर्ट होता है। यदि अनुमान के तौर पर औसत पांच फीसदी इंसेंटिव लगाया जाए तो ये रकम करीब 500 करोड़ बैठती है। यदि आगे से यह योजना बंद हुई तो यहां यहां के एक्सपोर्टर को बड़ा नुकसान होगा।