लॉकअप में पुलिस टार्चर के शिकार अगवानपुर के फर्नीचर व्यापारी की हालत
बिगड़ने पर परिजनों ने गुरुवार को सिविल लाइन थाने में अच्छा खासा बवाल
किया। परिजनों ने व्यापारी को थर्ड डिग्री देने वाले अगवानपुर चौकी इंचार्ज
धीरज सोलंकी और दो सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी लेकिन
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार कर दिया।
पीड़ित युवक को लेकर थाने
पहुंचे ग्रामीण पुलिस के रवैये पर भड़क उठे और हंगामा करने लगे। पुलिस ने
उन्हें खदेड़ने की कोशिश की तो भीड़ ने थाने में ही धक्कामुक्की कर दी। बाद
में थाने पहुंचे समाज कल्याण विभाग के सलाहकार दर्जा राज्यमंत्री हाजी
इकराम कुरैशी ने भीड़ को समझाकर शांत किया।
अगवानपुर
के मोहल्ला सैफियान निवासी फर्नीचर व्यापारी शाहे आलम पुत्र रईस अहमद को
शनिवार शाम अगवानपुर चौकी इंचार्ज धीरज सोलंकी ने कस्बे से ही उठाया था।
चौकी इंचार्ज ने शाहे आलम के साथ उसके दो साथी मो. रजी और नासिर को भी पकडा
था। लेकिन नासिर और मो. रजी को छोड़ दिया गया था।
जबकि शाहे आलम को पहले
चौकी और फिर थाने में निर्वस्त्र करके पट्टे व लाठियों से पीटा था। उसके
गुप्तांगों पर करेंट लगाए जाने का भी आरोप है जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
इसके बाद घबराई पुलिस ने उसे आधी रात छोड़ दिया था। शाहे आलम को आठ
अक्तूबर को हुई बाइक लूट के शक में पुलिस उठाकर लाई थी।
मामला उजागर होने
पर एसएसपी नितिन तिवारी ने एएसपी सुजाता सिंह को जांच के आदेश दिए थे।
बृहस्पतिवार को एफआईआर पर अड़े परिजनों से जब पुलिस वालों ने एफआईआर की जगह
इलाज करा देने का प्रस्ताव रखा तो वे भड़क गए। परिजनों की इंस्पेक्टर बीपी
सिंह बालियान से भी नोंकझोंक हुई।
समाज कल्याण विभाग के सलाहकार हाजी इकराम कुरैशी ने कहा कि शाहे आलम मेरा रिश्तेदार है, गलतफहमी में पुलिस ने उसे दो चार पट्टे मार दिए थे। मामला आपस का है जिसे सुलझा लिया गया है। शाहे
आलम को लेकर उसके परिजनों ने पुलिस उत्पीड़न की शिकायत की।
दर्जा राज्यमंत्री हाजी इकराम कुरैशी भी साथ थे। डीआईजी ने एसपी सिटी डा.
राम सुरेश यादव को तलब करके कार्रवाई के निर्देश दिए।